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ब‍िहार: नहीं द‍िख रहा शराबबंदी का असर तो न‍िचले अफसरों की है चूक- DIG ने बताई जांच में खामी

ब‍िहार में शराबबंदी के बावजूद लगातार शराब की तस्‍करी, होम ड‍िलीवरी तक के मामले सामने आ रहे हैं। भागलपुर रेंज के डीआईजी सुजीत कुमार का कहना है क‍ि इनकी गहराई से छानबीन करने में पुल‍िस महकमे की कमजोरी रही है।

Liquor Smuggling, Patna, Biharशराब की तस्करी के भंडाफोड़ के दौरान पुलिस द्वारा धरी गई शराब की बोतलें और मछलियां। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

ब‍िहार में शराबबंदी लागू होने का वक्‍त जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे ही बढ़ रही है शराब की तस्‍करी और अवैध कारोबार। इसके साथ ही इन पर लगाम लगाने के वादे भी तेज होते जा रहे हैं। लेक‍िन, ठोस कार्रवाई के उदाहरण नहीं बढ़ रहे हैं। इस बीच, एक बड़े पुल‍िस अफसर ने माना है क‍ि शराब तस्‍करी और अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में गहराई से छानबीन करने में पुल‍िस महकमे की कमजोरी रही है। हालांक‍ि, इस अध‍िकारी ने इसका ज‍िम्‍मेदार निचले स्‍तर के पुलिस अधिकारियों को बताया है।

भागलपुर रेंज के डीआईजी सुजीत कुमार ने कहा कि शराब पीने वाला जब पकड़ा जाए तो उससे ही उगलवाना होगा कि शराब कहां से खरीदी। नशाखोर को सिर्फ जेल भेज कर पुलिस वाले अपने काम की इतिश्री न समझें। तहकीकात गहराई में जाकर करने की जरूरत है। तभी शराब माफियों के बुने जाल को तोड़ा जा सकेगा। इस ओर अब पहल शुरू हो चुकी है।

डीआईजी ने बताया कि शराब की बरामदगी और अनुसंधान दो अगल-अलग पहलू है। अब तक पुलिस और मद्य निषेध महकमे ने शराब की बरामदगी करने और मामले दर्ज कर तस्कर या पीने वाले को जेल भेजने में काफी बढ़िया काम किया है। देसी शराब की भट्ठियां ध्वस्त की हैं। मगर अनुसंधान को गहराई देने की जरूरत पर निचले पुलिस अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। या उन्हें इस ओर गौर करने का समय नहीं मिला। इससे शराबबंदी का असर मीडिया वालों को नजर नहीं आता है।

डीआईजी ने कहा कि भागलपुर पुलिस रेंज में एक साथ दो हजार लीटर शराब बरामदगी के लंबित 13 मामलों की समीक्षा की गई। इसमें शराब कहां से आपूर्ति हो रही है या कहां से लाई जा रही है, इसके स्रोत पर गहन विवेचना करने की जरूरत पर जोर दिया है। मांग और आपूर्ति की जड़ तक अनुसंधान पहुंच जाने से एक हद तक लगाम लगेगी। अब तक शराब की बरामदगी और आरोपी को जेल भेज पुलिस अपने काम की इतिश्री मान बैठी थी। तहकीकात में यह भी गौर करने को कहा गया है कि शराबबंदी के पहले जिनने शराब की दुकानें ले रखी थीं, वे क्या कर रहे है?

डीआईजी ने कहा क‍ि आखिर कोई शख्स तो है जो शराब मंगवा कर होम डिलीवरी करवा रहा है। यह उससे उजागर हो सकता है जो शराब पीने के बाद दबोचा गया है। पीने वाला ही बताएगा कि शराब किससे खरीदी। और होम डिलीवरी करने वाला बताएगा कि शराब किसने उपलब्ध कराई। कड़ी दर कड़ी अनुसंधान में जोड़ी जाए तो असल तक आसानी से पहुंचा जा सकता। शराब भरी ट्रक पकड़ी गई है तो उसका गंतव्य कहां था। इस बात का सुराग पुलिस ढूंढ लेती है और कड़ी कार्रवाई करती है तो तस्करों की जड़ पर बड़ा प्रहार होगा। इस ओर काम करने की हिदायत मातहत पुलिसवालों को दी गई है। इसका परिणाम भी जल्द सामने आने की उम्मीद है।

डीआईजी के मुताब‍िक पता चला है कि होम डिलीवरी करने वाले रात 11 से एक बजे के बीच शराब की सप्लाई करने में लगे है। यह जानकारी तकनीकी जांच में सामने आई है। पुलिस ऐसे डिलीवरी बॉय पर खास नजर रख रही है। खाली बोतल खरीदने वाले कबाड़ियों से भी सुराग जुटाया जा सकता है? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि तकनीकी अनुसंधान ज्यादा कारगर है।

ध्यान रहे कि 1987 की होली में त्योहार पर शराबबंदी थी, लेक‍िन जहरीली शराब पीने से दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौतें हो गई थी।दर्जनों लोग बेहोशी और उल्टी-दस्त के शिकार हुए थे। इनमें से कई की आंखों की रोशनी चली गई या बेजुबान हो गए थे। जहरीली शराब बैगपाइपर की बोतलों में भरकर बेची गई थी।

‘1 कॉल पर मिल जाती है शराब’, कैमरे पर शख्स ने कबूला:

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