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पूर्व सेनाधिकारियों की चिट्ठी पर बोलीं रक्षा मंत्री- लेटर की विश्वसनीयता ही नहीं, हम सेना के राजनीतिकरण के खिलाफ

भारतीय सशस्त्र बलों के 150 से अधिक पूर्व अधिकारियों द्वारा राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखे जाने के मसले पर रक्षा मंत्री ने खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने उस चिट्ठी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

defense minister nirmala sitharamanरक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण फोटो सोर्स- ANI

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार (17 अप्रैल) को पूर्व सैनिकों द्वारा राष्ट्रपति कोविंद को लिखी गई चिट्ठी पर बातचीत की। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि उस चिट्ठी की विश्वसनीयता उस वक्त ही खत्म हो गई थी, जब 2 रिटायर्ड सेनाधिकारियों ने अपने हस्ताक्षर होने से साफ इनकार कर दिया था। जबकि चिट्ठी में उनके नाम भी लिखे थे। रक्षामंत्री ने कहा कि वह सशस्त्र बलों के राजनीतिकरण के खिलाफ हैं। वहीं, बालाकोट एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई का भी राजनीतिकरण नहीं किया गया।

यह था मामलाः भारतीय सशस्त्र बलों के 150 से अधिक पू्र्व अधिकारियों ने लोकसभा चुनावों के दौरान सेना के नाम पर राजनीति रोकने के लिए चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में राष्ट्रपति से अपील की गई थी, ‘‘राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे सेना, सेना की वर्दी या प्रतीकों का प्रयोग और सेना द्वारा किए जाने वाले किसी भी काम को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल न करें।’’ बता दें कि राष्ट्रपति तक पहुंचने से पहले ही यह चिट्ठी वायरल हो गई थी। हालांकि, चिट्ठी सामने आते ही सेना के पूर्व एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी और पूर्व आर्मी चीफ जनरल एफ रोड्रिग्स ने चिट्ठी में अपने साइन होने से इनकार कर दिया था।

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क्या कहा पूर्व सेनाधिकारी नेः पूर्व आर्मी चीफ जनरल एफ रोड्रिग्स ने इस मामले में कहा था, ‘‘हमने हमेशा वही किया, जो सत्ता में बैठी सरकार ने हमें आदेश दिया। हम केवल एक साधन मात्र हैं। हम अराजनीतिक हैं। कोई भी कुछ भी कह सकता है और फिर उसे नकली समाचार के रूप में बेच सकता है। मैं नहीं जानता कि चिट्ठी किसने लिखी है।’’

चिट्ठी लिखने वालों से अब तक नहीं मिलीः निर्मला सीतारमण ने बताया कि वह चिट्ठी लिखने वाले सेना के किसी भी पूर्व अधिकारी से नहीं मिली हैं। अपनी समस्या को लेकर राष्ट्रपति के पास जाने से किसी भी पूर्व अधिकारी को नहीं रोका गया है। हालांकि, जिस समय यह चिट्ठी लिखी गई, उस पर सवाल करना जरूरी था। रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस तरह से हमने सशस्र बलों को खुली छूट दी थी, उसके बिना सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक को अंजाम दे पाना आसान नहीं था। साल 2008 के आतंकी हमले के बाद कुछ  नहीं हुआ। ऐसा नहींं है कि सबकुछ 2019 में हुआ। 2016 में भी उरी हमले के बाद भी एक्शन लिया गया था।

मानसिकता स्पष्ट होनी चाहिएः सीतारमण ने कहा, ‘‘मैं केवल इस तथ्य को स्पष्ट करना चाह रही हूं कि सरकार की मानसिकता स्पष्ट होनी चाहिए। ऐसे में सरकार द्वारा देश हित में लिए गए अहम फैसलों के बारे में बताना सशस्त्र बलों का राजनीतिकरण नहीं है। मैं चुनाव प्रचार के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में गई तो लोगों ने बालाकोट एयर स्ट्राइक के बारे में पूछा। मैं विकास या किसानों की आय दोगुनी करने से संबंधित मुद्दों पर जनता से बात कर रही थी। भीड़ के कोने से लोग बालाकोट और पुलवामा चिल्ला रहे थे। मैंने कुछ देर तक जवाब नहीं दिया। नेतागण कहते हैं कि आपको रक्षा मंत्री होने के नाते पुलवामा हमले के बारे में बात करनी चाहिए। मैंने जैसे ही अपने मुंह से पुलवामा या बालाकोट शब्द निकाला, तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी।’’

लोग चाहते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाईः रक्षा मंत्री ने कहा कि इस समय लोगों का मूड वैसा ही है, जैसा उरी हमले के समय पर था। लोग हमारी तरफ उम्मीद की नजरों से देखते हैं। वे चाहते हैं कि सरकार आतंकवाद को खत्म करने के लिए कार्रवाई करे। दक्षिण राज्यों में भारी संख्या में युवा बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद सेना का हिस्सा बनने में इच्छुक हैं।

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