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CJI की कोर्टरूम का हो सकता है लाइव प्रसारण, केंद्र ने तीन महीने के पायलट प्रोजेक्ट का दिया प्रस्ताव

केन्द्र ने आज उच्चतम न्यायालय से कहा कि प्रयोगात्मक स्तर पर प्रधान न्यायाधीश के न्यायालय में होने वाली सांविधानिक मामलों की न्यायिक कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिग की जा सकती है और उसका सीधा प्रसारण किया जा सकता है।

Author नई दिल्ली | Updated: July 23, 2018 5:15 PM
सुप्रीम कोर्ट

केन्द्र ने आज उच्चतम न्यायालय से कहा कि प्रयोगात्मक स्तर पर प्रधान न्यायाधीश के न्यायालय में होने वाली सांविधानिक मामलों की न्यायिक कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिग की जा सकती है और उसका सीधा प्रसारण किया जा सकता है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ से अटार्नी जनरल के . के . वेणुगोपाल ने कहा कि पायलट योजना के तहत न्यायिक कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग और सीधा प्रसारण किया जा सकता है। न्यायालय ने इस मामले में अटार्नी जनरल से सहयोग करने का आग्रह किया था।

वेणुगोपाल ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों का बाद में विश्लेषण करके इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रयोग के तौर पर एक से तीन महीने तक न्यायिक कार्यवाही का सीधा प्रसारण करके यह भी पता लगाया जा सकता है कि यह तकनीक कैसा काम कर रही है।
पीठ ने व्यक्तिगत रूप से जनहित याचिका दायर करने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयंिसह सहित सभी पक्षकारों से कहा कि इस संबंध में वे अटार्नी जनरल को अपने सुझाव दें। पीठ ने कहा कि वेणुगोपाल इन सुझाव का संकलन करके उसे न्यायालय में पेश करेंगे जो बाद में उसे मंजूरी देगा। पीठ इस मामले में अब 30 जुलाई को आगे सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने नौ जुलाई को कहा था कि न्यायिक कार्यवाही का सीधा प्रसारण अब वक्त की जरूरत है और उसने इस संबंध में सुझाव मांगे थे।

पीठ का मानना था कि बलात्कार जैसे मामलों की सुनवाई को छोड़कर अन्य सारे मामलों की सुनवाई में सभी शामिल हो सकते हैं और इस कार्यवाही का सीधा प्रसारण करने से पहले से प्रतिपादित सिद्धांत और भी मजबूत होगा। जयसिंह ने अपनी याचिका में सांविधानिक और राष्ट्रीय महत्व के मामलों का सीधा प्रसारण करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार है और सांविधानिक तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों का सीधा प्रसारण किया जा सकता है।

उन्होंने कहा था कि यदि शीर्ष अदालत की कार्यवाही का सीधा प्रसारण संभव नहीं हो तो इसकी वीडियो रिकार्डिंग की अनुमति दी जानी चाहिए। इससे पहले कानून की छात्रा स्वप्निल त्रिपाठी ने भी शीर्ष अदालत परिसर में सीधे प्रसारण के कक्ष स्थापित करने का अनुरोध किया था।

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