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बीजेपी सांसद के खिलाफ पत्रकार के फेसबुक ग्रुप में किसी मेंबर ने किया कमेंट, पर पुलिस ने पत्रकार को कर लिया गिरफ्तार

रिगजिन जम्मू के दैनिक स्टेट टाइम्स के लेह कॉरस्पॉन्डेंट हैं। रिगजिन एक फेसबुक ग्रुप 'लद्दाख इन द मीडिया' भी चलाते हैं। इस ग्रुप में 34000 सदस्य हैं।

Leh journalist, Tsewang Rigzin, BJP MP, ladakh BJP MP, भाजपा सांसद अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने पर पीएम के समर्थन में जोरदार भाषण से चर्चा में आए थे। (फाइल फोटो)

लद्दाख में एक न्यूजपेपर के पत्रकार को उस समय गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा जब उनके फेसबुक ग्रुप में किसी मेंबर ने भाजपा सांसद के खिलाफ कमेंट कर दिया। पुलिस हालांकि, उस कमेंट करने वाले व्यक्ति का पता तो नहीं लगा पाई लेकिन पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया।

यह गिरफ्तारी लद्दाख से भाजपा सांसद जाम्यांग शेरिंग नामग्याल की शिकायत के आधार पर हुई। गिरफ्तार हुए पत्रकार शेवांग रिगजिन हैं। रिगजिन जम्मू के दैनिक स्टेट टाइम्स के लेह कॉरस्पॉन्डेंट हैं। रिगजिन एक फेसबुक ग्रुप ‘लद्दाख इन द मीडिया’ भी चलाते हैं। इस ग्रुप में 34000 सदस्य हैं। 3 सितंबर को इस ग्रुप के एक सदस्य ने लद्दाख सांसद के खिलाफ कमेंट कर दिया। इसके बाद पुलिस ने रिगजिन को 5 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया।

हालांकि, पुलिस अभी तक कमेंट करने वाले का पता नहीं लगा पाई है। पुलिस ने गिरफ्तार के पीछे रिगजिन के पेज का एडमिन होना बताया है। बाद में रिगजिन को उसी दिन बेल मिल गई। द वायर की खबर के अनुसार खास बात है कि पुलिस ने पत्रकार की गिरफ्तारी आईपीसी की धारा 188 के अंतर्गत की है। यह लोक सेवक की अवमानना करने पर लगाई जाती है।

हालांकि, रिगजिन को अभी तक शिकायत की कॉपी नहीं उपलब्ध कराई गई है। इस संबंध में रिगजिन का कहना है कि पुलिस के उस पोस्ट को उनके संज्ञान में लाने से पहले तक उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी। इसके बाद उन्होंने इसे डिलीट करने पेशकश की। इस पर पुलिस ने सबूतों से छेड़छाड़ का हवाला देते हुए ऐसा नहीं करने की बात कही।

इसके बाद पुलिस ने भाजपा सांसद की शिकायत पर संज्ञान लिया। पत्रकार रिगजिन का कहना है कि जब मैं किसी सदस्य को ग्रुप में अप्रूव करता हूं तो मैं उस व्यक्ति की छोटी से छोटी जानकारी की पुष्टि नहीं कर सकता हूं। उदाहरण के लिए मैं उसका आधार कार्ड नहीं मांग सकता हूं। उन्होंने कहा कि कई लोग शहर में होने वाली अनेक घटनाओं के बारे में इसमें पोस्ट करते हैं।

रिगजिन ने आगे कहा कि पुलिस के पास जाने की बजाय भाजपा सांसद उन्हें इस बारे में फोन कर सकते थे। जब मैंने इस कमेंट को देखता तो मुझे भी यह आपत्तिजनक लगता तो मैंने उसे हटा दिया होता। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 में एक मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था कि किसी मेंबर के कमेंट के लिए एडमिन को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।

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