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Dance Bar: नैतिकता को कानूनी रूप देना एक बहुत मुश्किल काम है

अलग मराठवाड़ा पर अपनी टिप्पणियों को लेकर हंगामा होने के बाद महाराष्ट्र महाधिवक्ता पद से इस्तीफा दे चुके श्रीहरि अणे ने बुधवार को डांस बार के मुद्दे पर सरकार को ‘नैतिकता को कानूनी रूप देने’ के संबंध में आगाह किया।

Author मुंबई | March 24, 2016 2:59 AM
(File Photo)

अलग मराठवाड़ा पर अपनी टिप्पणियों को लेकर हंगामा होने के बाद महाराष्ट्र महाधिवक्ता पद से इस्तीफा दे चुके श्रीहरि अणे ने बुधवार को डांस बार के मुद्दे पर सरकार को ‘नैतिकता को कानूनी रूप देने’ के संबंध में आगाह किया। उन्होंने कहा, ‘जहां तक इन डांस बारों की बात है तो पुरुषों के साथ कामकाजी महिलाओं की समस्याओं को भी उनकी आजीविका के अधिकार के तौर पर विचार करना चाहिए।’

अणे ने कहा, ‘ऐसे उद्योग में जहां काम की प्रकृति बहुत जोखिम भरी है, वहां ऐसे कानून की जरूरत है जिससे इस तरह के खतरे कम हों।’ उन्होंने कहा, ‘डांस बारों में जहां महिलाओं को मुख्य रूप से पुरुष दर्शकों के सामने नृत्य करना पड़ता है, वहां व्यावसायिक खतरे हैं और महज इन्हीं खतरों के कारण आप कारोबार बंद नहीं कर सकते हैं। सही तरीका यह होगा कि इन खतरों को कम करना सुनिश्चित किया जाए।’
अणे ने कहा, ‘नैतिक आयाम में कानून बनाने की प्रक्रिया भ्रमित हो रही है।

ऐसे में नैतिकता को कानूनी रूप देना एक बहुत मुश्किल काम है।’ उन्होंने कहा कि दूसरी ओर सुरक्षा (महिलाओं की) को कानूनी रूप देना बहुत आसान है। उन्होंने कहा, ‘अगर कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और वेश्यावृत्ति जैसी सामाजिक गतिविधियों को बंद करने के मकसद से कानून बनाया जाता है तो ऐसा करना मुश्किल नहीं होगा।’ अणे ने कहा, ‘बहरहाल, अगर इसमें मोरल पुलिसिंग की बात आती है तो इस तरह का कानून समस्या खड़ी कर सकता है और नैतिकता को कानूनी रूप देने के लिए कानून बनाना बहुत मुश्किल होता है।’

अणे की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस हालिया बयान के खिलाफ आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार राज्य विधानसभा के जारी बजट सत्र में डांस बार प्रतिबंध पर एक व्यापक नया कानून लाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में मुंबई के होटलों व रेस्त्राओं में डांस बार को लाइसेंस जारी करने का रास्ता साफ करते हुए रेस्त्रां व डांस करने की जगहों से सीसीटीवी कैमरों को लगाने की बात हटाते हुए उसकी परमिट की शर्तों को संशोधित किया था। राज्य सरकार ने 2005 में मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य स्थानों पर डांस बारों पर प्रतिबंध लगा दिया था। समूचे राज्य के करीब 1,500 डांस बारों में 75,000 से अधिक महिला डांसर कार्यरत थीं।

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