West Bengal News: तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी का दफ्तर कैमक स्ट्रीट स्थित 9 नंबर की इमारत में है। इसके मालिक ने दो मंजिलों को खाली करने के लिए कानूनी नोटिस भेजा है। इसमें आरोप लगाया गया है कि समझौते की शर्तों को पूरा किए बिना उन पर कब्जा किया गया था।
मालिक रमा देवी गोयनका की वकील साग्निका बनर्जी के मुताबिक, तृणमूल यूथ कांग्रेस ने 2020 में उनके क्लाइंट के साथ 10 साल के लिए एक एग्रीमेंट किया था। उन्होंने बताया कि इस एग्रीमेंट पर जेल में बंद पूर्व टीएमसी पार्षद देबराज चक्रवर्ती ने साइन किए थे।
एग्रीमेंट की शर्तों को पूरा नहीं किया गया- वकील
वकील ने आरोप लगाया कि एग्रीमेंट की शर्तों को पूरा नहीं किया गया और कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) लिए बिना ही दोनों फ्लोर का कब्जा ले लिया गया। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सग्निका ने कहा, “मेरे मुवक्किल ने साफ तौर पर कहा था कि संपत्ति का कब्जा तभी लिया जा सकता है जब सीसी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि वे इसे कोलकाता नगर निगम से हासिल करेंगे। इसके अलावा, मालिक को यह जानकारी मिली है कि कुछ अवैध गतिविधियां चल रही थीं।”
संगिका ने यह भी दावा किया कि मकान मालिक ने पहले भी दो मंजिलों पर कथित कब्जे के संबंध में पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की बीरभूम इकाई ने मकान मालिक को सूचित किए बिना ऊपरी मंजिल पर कब्जा कर लिया था।
24 अगस्त को भेजा गया कानूनी नोटिस
साग्निका ने बताया कि दोनों मंजिलों को खाली कराने के लिए 24 अगस्त को ईमेल और 25 अगस्त को डाक द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया था। उन्होंने दावा किया कि परिसर अभी तक खाली नहीं कराया गया है।
उन्होंने कहा, “पिछली सरकार के दौरान पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब सरकार बदलने से हमें कुछ उम्मीद जगी है। हम कानूनी कार्रवाई करेंगे।” यह नोटिस कैमक स्ट्रीट स्थित दफ्तर में इमारत पर लगे एक बड़े होर्डिंग को हटाने को लेकर हुए विवाद के कुछ दिनों बाद आया है।
गुरुवार दोपहर को केएमसी के अधिकारी पुलिस के साथ परिसर में होर्डिंग हटाने के लिए पहुंचे। इसे नगर निगम के अधिकारियों ने अवैध और सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर अधिकारियों को अंदर जाने से रोका, जिसके कारण बहस और हाथापाई हुई। अभिषेक बनर्जी और टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन भी कार्यालय पहुंचे।
अधिकारियों ने तोड़ दिया बिलबोर्ड
अधिकारियों ने परिसर में प्रवेश किया और गैस कटर की मदद से बिलबोर्ड को तोड़ दिया। पुलिस ने बाद में इस घटना के संबंध में 13 लोगों को गिरफ्तार किया। नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि होर्डिंग को लोहे के फ्रेम पर लगाया गया था और यह नीचे मौजूद लोगों के लिए बारिश और तूफान के दौरान खतरा पैदा करता था।
पॉल ने कहा, “अतिक्रमण का मुद्दा बाद में आता है। हम नगर पालिका और पुलिस के पास गए और पता चला कि लोहे के फ्रेम पर लगा तृणमूल कांग्रेस का होर्डिंग बहुत खतरनाक है। अगर आज आंधी-तूफान के दौरान वह लोहे का बीम ऊपर से गिर जाए, तो 100-200 लोग मौके पर ही मर जाएंगे। इसीलिए होर्डिंग को हटा दिया गया है।” उन्होंने कहा कि अतिक्रमण से संबंधित आरोपों की भी जांच की जाएगी।
अभिषेक बनर्जी ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी
अभिषेक बनर्जी ने बाद में कानूनी कार्रवाई की धमकी दी और आरोप लगाया कि नगर निगम अधिकारियों ने बिना कानूनी नोटिस भेजे ही बिलबोर्ड को ध्वस्त कर दिया था। उन्होंने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। यह मामला शुक्रवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजा बसु चौधरी के समक्ष आया। न्यायालय ने पाया कि चूंकि बिलबोर्ड पहले ही हटा दिया गया था और कोई अंतरिम सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती थी, इसलिए यह मामला प्रासंगिक नहीं है।
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