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MP : नेता प्रतिपक्ष पर मंथन अब अंतिम दौर में, गोपाल भार्गव-नरोत्तम मिश्रा सबसे आगे, जानिए कौन कितना भारी?

शुरुआती दौर में शिवराज सिंह को मजबूत दावेदार माना जा रहा था लेकिन शनिवार को उन्होंने खुद को रेस से बाहर कर लिया।

गोपाल भार्गव और नरोत्तम मिश्रा (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश में सत्ता खो चुकी भारतीय जनता पार्टी में फिलहाल नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए मशक्कत जारी है। सोमवार शाम को पार्टी की तरफ से इस पद के लिए नाम का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। फिलहाल इस रेस में शिवराज सरकार में मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा और गोपाल भार्गव के नाम हैं। बताया जा रहा है कि भार्गव की संभावना सबसे ज्यादा है। हालांकि इनके अलावा भूपेंद्र सिंह का नाम भी काफी चर्चाओं में रहा था। उल्लेखनीय है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद को पहले ही दौड़ से बाहर कर चुके हैं।

नरोत्तम मिश्राः 1990 में पहली बार विधायक बने मिश्रा को शिवराज सिंह चौहान का काफी करीबी माना जाता है। इसके बाद वे 1998, 2003, 2008 और 2013 में लगातार चुनाव जीते। पहली बार उन्हें बाबूलाल गौर की सरकार में 2005 में मंत्रिमंडल में भी जगह मिली। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सरकार में भी उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां मिलीं। फिलहाल अमित शाह ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी नियुक्त किया है। उनके खिलाफ चुनावी खर्च की गलत जानकारी देने का आरोप भी लगा था। इसके बाद जून 2017 में चुनाव आयोग ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बावजूद शिवराज सरकार ने उनका साथ दिया। बाद में मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी केंद्रीय नेतृत्व में भी अच्छी पकड़ मानी जाती है।

गोपाल भार्गवः छात्र राजनीतिक के दौर में कॉलेज निर्माण के लिए जेल में रहे गोपाल भार्गव 1980 में पहली बार गढ़ाकोटा नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 1984 में पहली बार रेहली से विधायक बने। भार्गव को उमा भारती की सरकार में पहली बार मंत्री बनाया गया था। 2008 में उन्हें पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया। साल में दो बार सामूहिक विवाह सम्मेलन करवाने वाले भार्गव को ‘शादी बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने बेटे की शादी भी ऐसे ही समारोह में की थी। फिलहाल वे मध्य प्रदेश विधानसभा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।

यूं रेस से बाहर हुए शिवराजः भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और डॉ विनय सहस्रबुद्धे को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया है। चुनावी नतीजों में कांग्रेस को कड़ा मुकाबला देने के बाद मिली हार के बाद से ही नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर जोर आजमाइश तेज हो गई थी। शुरुआती दौर में शिवराज सिंह को मजबूत दावेदार माना जा रहा था लेकिन शनिवार को उन्होंने खुद कह दिया कि वह 13 साल तक लगातार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, इसलिए चाहते हैं कि नेता प्रतिपक्ष पद पर किसी नए व्यक्ति को मौका मिले।

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