केरल अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में है और राज्य में सत्ता में लंबे समय से बनी रहने वाली सीपीआई (एम)-नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) अपनी दस साल की उपलब्धियों को सामने रख कर विपक्षी कांग्रेस-नेतृत्व वाली यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) के सामने खड़ी चुनौती का मुकाबला कर रही है। पिछली बार दिसंबर 2025 में स्थानीय निकाय चुनावों में यूडीएफ की वापसी के बाद अब दोनों गठबंधन आम चुनाव में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश में हैं।

इस बार के चुनावों में एलडीएफ ने पुराने भ्रष्टाचार और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से दूरी बनाई है। इसके बजाय मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन की अगुआई में एलडीएफ ने विकास के अपने कामों को मुख्य मुद्दा बनाया है। दस साल के शासन में राज्य में हुए बदलाव और उन्नति को उजागर करते हुए एलडीएफ ने कांग्रेस सरकार (2011-2016) की तुलना की है, जिससे कांग्रेस के लिए खुद के पिछले रिकॉर्ड को बचाना मुश्किल हो गया है।

विज्ञापन में सीधे तुलना से कांग्रेस असहज स्थिति में हुई

गुरुवार को केरल के कई अखबारों में सूचना और जनसंपर्क विभाग की दो पेज की विज्ञापन रिपोर्ट छपी, जिसमें एक पेज पर कांग्रेस के समय की खबरें और दूसरी तरफ एलडीएफ के हाल के वर्षों की खबरें दिखाई गईं। कांग्रेस के समय की खबरों में बिजली कटौती, स्कूल बंद, पेंशन बकाया और नेशनल हाईवे या गैल पाइपलाइन जैसे रुके प्रोजेक्ट्स की आलोचना शामिल थी। वहीं एलडीएफ के पेज में दिखाया गया कि पिछले दस सालों में राज्य में कैसे बदलाव आए और विकास के काम पूरे हुए। इस तरह के सीधे तुलना वाले विज्ञापन ने कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल दिया।

एलडीएफ की तरक्की की वजह से कांग्रेस सीधे इस पर हमला करने में फंसी हुई है, क्योंकि कई विकास कार्य ऐसे इलाकों में हुए हैं जहां कांग्रेस के विधायक हैं। इसके अलावा, एलडीएफ का ‘नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम’(‘Nava Kerala Citizens Response Programme’) और सरकारी कर्मचारियों तथा लाभार्थियों को भेजे गए व्यक्तिगत संदेश चुनाव से पहले समर्थन जुटाने के आरोपों में फंस गए हैं।

एलडीएफ की सबसे बड़ी ताकत इसके सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम हैं। राज्य के करीब 30% मतदाताओं (लगभग 1 करोड़) को हर महीने पेंशन और महिलाओं एवं युवाओं के लिए अनुदान दिया जाता है। 2021 के चुनाव में कोविड महामारी के दौरान एलडीएफ ने 60 लाख लाभार्थियों की पेंशन बढ़ाकर 1,600 रुपये कर दी थी। इस साल पेंशन को और बढ़ाकर 2,000 रुपये करने की घोषणा की गई है। ये कदम एलडीएफ के लिए अपने विकास और कल्याण की साख को दिखाने का सबसे बड़ा हथियार बने हैं।

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हाल ही में 24 फरवरी को तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने खम्मम जिले की विनोबा नवोदय कॉलोनी में 31 एकड़ जमीन पर बने 170 से ज्यादा घरों को ध्वस्त कर दिया। इस काम के लिए करीब 4,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। कई परिवारों ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने कार्रवाई जारी रखी। इस पर विपक्षी दलों भारत राष्ट्र समिति (BRS) और बीजेपी ने तीखी आलोचना की। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक