राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी के सोचने पर मजबूर कर दिया। 38 साल की बबीता धाकड़ जयपुर के टोंक रोड के पास एक रिहायशी कॉलोनी की संकरी गलियों में रहती थी। उसके पड़ोसी उसे एक बेहद शांत स्वभाव की महिला बताते हैं, जिसे वह घर से बाहर बहुत कम ही देखते थे और जब भी देखते थे तो उसके देखकर कुछ असामान्य सा प्रतीत नहीं होता था।

हैरत इस बात हुई जब बबीता की कुछ कट्टरपंथी समूहों में उनकी ऑनलाइन भागीदारी उनके आसपास के लोगों से छिपी रही। यहां तक की उसके परिवार को इंटरनेट पर उसकी गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जिसके बारे में अब जांचकर्ताओं का कहना है कि वे जैश-ए-मोहम्मद से उनके कथित संबंधों की जांच का आधार बनीं। 22 जून को राजस्थान की आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने उMS गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, बबीता की जीवन और समाज से कथित मोहभंग ने ही उसे ऐसे संपर्क स्थापित करने के लिए प्रेरित किया होगा। उसकी शादी 2017 में हुई थी, लेकिन यह विवाह एक महीने से भी कम समय तक चला। उसी वर्ष कंप्यूटर कोर्स पूरा करने के बाद वह इंटरनेट पर काफी समय बिताती थी।

एक साल पहले, उसने “जिहादी और राष्ट्र-विरोधी” सोशल मीडिया पेजों, हैंडल और प्रोफाइल के साथ बातचीत शुरू की, जो अधिकारियों के अनुसार, केवल “जिज्ञासा से प्रेरित” थी। एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “वह उनके वीडियो देखा करती थी और उन्हें साहसी और करिश्माई पाती थी।”

एक अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे वह कथित तौर पर विचारधारा में और गहराई से उतरती गई, उसने जैश-ए-मोहम्मद, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसएई, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े सोशल मीडिया पेजों को लाइक किया और उनसे बातचीत की। खासकर उसने उन पेजों को लाइक किया जिनकी प्रोफाइल पिक्चर में बंदूकें लगी थीं।

अधिकारी ने बताया कि बबीता धाकड़ ने सोशल मीडिया पर ऐसे 300 से अधिक ग्रुप जॉइन किए थे। वहां से उसने नंबर एक्सचेंज किए और व्हाट्सएप और फेसबुक मैसेंजर पर इन ग्रुप्स के कुछ संचालकों से चैट करना शुरू कर दिया। उसके फोन में कथित तौर पर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संपर्क मिले हैं।

इंटरनेट से दोस्ती

अधिकारी ने कहा कि असल में उसे एक ऐसे शख्स ने अपने जाल में फंसाया या बहकाया जो उसकी खूबसूरती, उसकी आंखों आदि की लगातार तारीफ करता रहा। बातचीत देर रात तक चलती थी, जिससे वह उसके करीब आ गई और आखिरकार उस व्यक्ति से शादी करना चाहती थी जिसने खुद को अबू उबैदा बताया, जो जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक और नेता मसूद अजहर का करीबी सहयोगी था।

अधिकारी ने बताया कि एक अन्य व्यक्ति, जिसके साथ वह कथित तौर पर संपर्क में थी। वह खुद को यूसुफ अजहर उर्फ ​​मोहम्मद सलीम बता रहा था, जो मसूद अजहर का बहनोई था। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यूसुफ पिछले साल 7 मई को किए गए हमलों में मारा गया था। ये हमले 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए थे।

अधिकारी ने बताया कि वीडियो कॉल के दौरान, उबैदा अपना चेहरा ढके रखता था और कहता था कि सुरक्षा कारणों से वह अपना चेहरा नहीं दिखा सकता। चूंकि वह उससे शादी करना चाहती थी, इसलिए एक मुस्लिम मौलवी के साथ एक ‘समारोह’ आयोजित किया गया, जिसमें उसे धर्म परिवर्तन के लिए कलमा पढ़ने को कहा गया और उसे खदीजा नाम दिया गया। उसे नमाज के बारे में भी सिखाया गया।

जांचकर्ताओं ने बताया कि समाज से अलग-थलग पड़ जाने और उससे मोहभंग होने के कारण बबीता का उस विचारधारा से भावनात्मक जुड़ाव हो गया था। उदाहरण के लिए, उन्होंने बताया कि उसने जिन पेजों को लाइक किया था उनमें से एक ‘दुनिया धोखेबाज़’ था। उन्होंने यह भी बताया कि चैट के ज़रिए उसे उन लोगों से समर्थन मिला जिन्हें वह “बहादुर योद्धा” मानती थी।

अधिकारी ने कहा कि शायद उसने सोचा होगा कि पाकिस्तान में उसका जीवन बेहतर होगा और वह वहां जाना भी चाहती थी। उसने बीए की पढ़ाई पूरी कर ली थी, लेकिन उसके पास नौकरी नहीं थी। इसके अलावा, उसका तलाक का मामला और दहेज उत्पीड़न का मामला भी लंबित था। अपने माता-पिता से अलग होने के बाद से वह उनके साथ रह रही थी।

एक जांचकर्ता ने बताया कि इसके बाद, उसे बताया गया कि उसे नेपाल-सऊदी अरब-यूएई मार्ग से पाकिस्तान लाया जा सकता है। हालांकि, जब उसने बताया कि उसके पास वीजा या पासपोर्ट भी नहीं है और इसके लिए पैसे की भी जरूरत होगी, तो उन्होंने उससे कहा कि वे उसे क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पैसे भेज देंगे। योजना अवैध यात्रा की व्यवस्था करने की थी। हालांकि, पुलिस ने कहा कि उसकी गिरफ्तारी से पहले इस तरह का कोई लेन-देन नहीं हुआ था।

पुलिस को ‘संदिग्ध’ गतिविधि का पता चला

एटीएस एसपी मनीष त्रिपाठी ने उसकी गिरफ्तारी के समय कहा था कि सोशल मीडिया पर उसकी संदिग्ध गतिविधियों ने पुलिस का ध्यान खींचा था। जब पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच की तो उन्हें पता चला कि वह कथित तौर पर ऑनलाइन “राष्ट्र-विरोधी” गतिविधियां कर रही थी।

अधिकारियों का कहना है कि हालांकि वे उसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रहे थे, लेकिन मामले में अहम सबूत तब मिले जब यह पता चला कि वह कुछ ऐसे फोन नंबरों के संपर्क में थी जो 2016 में जम्मू और कश्मीर में दर्ज एक “संवेदनशील” एफआईआर से जुड़े हुए थे।

बबीता के खिलाफ UAPA की धारा 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) और 39 (आतंकवादी संगठन को समर्थन देने से संबंधित अपराध) के साथ-साथ BNS की धारा 238 (सबूतों को मिटाने से संबंधित) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि बबीता ने अपने फोन से डेटा डिलीट कर दिया था, जो फिलहाल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के पास है।

जांचकर्ताओं का कहना है कि बबीता को अभी तक कोई कार्य नहीं दिया गया था और उसने कोई गोपनीय जानकारी भी साझा नहीं की थी, क्योंकि वह ऑपरेशन के शुरुआती चरण में ही पकड़ी गई। हालांकि, आरोप है कि बबीता ने कुछ सिम कार्ड भी खरीदे थे, जिनका इस्तेमाल अन्य लोग व्हाट्सएप के लिए कर रहे थे।

जांचकर्ताओं ने उसे अत्यधिक कट्टरपंथी और एक बड़ा संभावित खतरा बताया। उसके पड़ोसियों का कहना है कि जब भी उन्होंने उसे देखा, तो उनसे बातचीत बहुत सीमित रही। एक पड़ोसी, जिसने अपनी पहचान गुप्त रखने पर कहा कि यह एक नई बस्ती है। हमें नहीं पता कि कौन कहां से आकर बसा है। कभी-कभी, संबंध स्थापित करने में सालों लग जाते हैं। जहां तक ​​उसके माता-पिता की बात है, पुलिस का कहना है कि उन्हें उसकी देर रात की चैटिंग या वीडियो कॉल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

एटीएस एसपी मनीष त्रिपाठी ने कहा कि जांच में पता चला कि वह कुछ ऐसे विदेशी नागरिकों के संपर्क में थी जो भारत की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा, वे उसके माध्यम से जानकारी हासिल करके भारत में आतंकवाद फैलाने का प्रयास कर रहे थे।

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