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”हत्‍या की बड़ी वजह बन रही जमीन, न‍िपटने के ल‍िए तकनीक का सहारा लेगी पुल‍िस”

डीआईजी ने बढ़ते जमीन व‍िवाद पर च‍िंंता जताई। जमीन का झगड़ा बेहद जानलेवा साब‍ित हो रहा है। इसमें रिश्ते-नाते सब दूर हो गए है। कब किसकी हत्या लोग कर देंगे, कहना मुश्किल है।

फोटो- भागलपुर रेंज के डीआईजी सुजीत कुमार।

बिहार में हो रही ज्यादातर हत्याओं की जड़ भूमि विवाद है। इसके जल्द निपटारे के लिए सरकार कुछ आधुनिक तकनीक का उपयोग करने की सोच रही है। साथ ही पुलिस को भी अपनी छवि साफ बनाने की जरूरत है। दिन -रात पुलिस वाले पर्व-त्योहार, घर- द्वार छोड़कर ड्यूटी करते है। मगर इसका कोई वैसा इनाम या शाबासी नहीं है, क्योंकि जनता का नजरिया पुलिस के प्रति ठीक नहीं है। पुलिस भी अपनी स्‍थायी सकारात्‍मक छव‍ि बनाने में कामयाब नहीं हो पाई है। यह बात भागलपुर रेंज के नए डीआईजी सुजीत कुमार ने कही।

गंगा तट पर स्‍थ‍ित दफ्तर में हुई बातचीत में उन्‍होंने बताया क‍ि पुलिस कांस्टेबल या अधिकारियों की सभा में सबसे पहले यही बताता हूं क‍ि पुलिस की वर्दी पहनी है तो इस पर दाग मत लगने दो। पुलिस की छव‍ि सुधारो । समाज सम्मान देगा तभी दुनिया सलाम करेगी। आम नागरिकों के सहयोगी बनिए। क्षणिक लाभ बदनामी का सेहरा है। इससे बचिए। तभी फौजी जैसी छव‍ि जनता की निगाह में बन पाएगी।

डीआईजी ने बढ़ते जमीन व‍िवाद पर च‍िंंता जताई। जमीन का झगड़ा बेहद जानलेवा साब‍ित हो रहा है। इसमें रिश्ते-नाते सब दूर हो गए है। कब किसकी हत्या लोग कर देंगे, कहना मुश्किल है। बता दें क‍ि होली के कुछ द‍िन पहले इलाके में कई हत्‍याएं हुईं। डीआईजी के मुताब‍िक इनमें से ज्‍यादातर की वजह जमीन संबंधी व‍िवाद ही है। सुजीत कुमार ने अपने पुराने द‍िन भी याद क‍िए और बताया क‍ि 2008 में व्यावहारिक प्रशिक्षण लेने के ल‍िए उन्‍हें भागलपुर में ही तैनात किया गया था । उस वक्त की तुलना में वर्तमान पुलिसिंग बेहतर है। तब माहौल अलग था। अपराध ज्‍यादा होते थे। उन्‍होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान सुलतानगंज की थानेदारी मिली थी। नाथनगर और सुलतानगंज इलाके को जानने का मौका तभी मिल गया था।

आईपीएस सुजीत कुमार ने डीआईजी ओहदे पर पदोन्नति के बाद इसी साल छह जनवरी को भागलपुर में योगदान दिया है। इससे पहले पटना रेलवे में एसएसपी थे। उससे पहले बिहार के कई ज़िलों के एसपी के अलावा सीबीआई (दिल्ली) में भी काम करने का तजुर्बा है। बिहार में बढ़ते अपराध के सवाल पर वह कहते है कि एनसीआरबी के आंकड़ों पर गौर करने से यह साफ हो जाएगा कि अपराध का ग्राफ गिरा है। 2018 में बिहार आठवें पायदान पर था, जो 2019 में ऊपर से नौवीं सीढ़ी पर आ गया। इसे पुलिस की कामयाबी ही कहा जाएगा।

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