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भूमि अधिग्रहण विधेयक की संयुक्त समिति का कार्यकाल बढ़ा

विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक का अध्ययन कर रही संसद की संयुक्त समिति के कार्यकाल को बुधवार को आगामी बजट सत्र के पहले भाग के अंतिम दिन तक के लिए बढ़ा दिया गया..

Author नई दिल्ली | December 24, 2015 01:06 am
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का ठीक से प्रचार-प्रसार किया जाए, तो निस्संदेह किसान इसका लाभ उठाएंगे। प्रीमियम राशि कम होने के कारण मंझोले किसान भी अपनी फसलों का बीमा कराने को उत्सुक होंगे.. (फाइल फोटो)

विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक का अध्ययन कर रही संसद की संयुक्त समिति के कार्यकाल को बुधवार को आगामी बजट सत्र के पहले भाग के अंतिम दिन तक के लिए बढ़ा दिया गया। समिति के अध्यक्ष एसएस अहलुवालिया ने बुधवार को लोकसभा में इस आशय का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इससे पहले 30 नवंबर को इस समिति का कार्यकाल शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन यानी बुधवार तक के लिए बढ़ाया गया था।

प्रस्ताव में कहा गया था-यह सभा भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक 2015 संबंधी संयुक्त समिति द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किए जाने का समय बजट सत्र 2016 के पहले भाग के अंतिम दिन तक बढ़ाती है। आमतौर पर बजट सत्र का पहला हिस्सा मार्च में समाप्त होता है और दूसरा हिस्सा अप्रैल से शुरू होकर मई में समाप्त होता है।

समिति ने 16 दिसंबर को हुई अपनी बैठक में और समय लेने का निर्णय किया क्योंकि कुछ ही राज्यों ने विधेयक के विभिन्न उपबंधों पर अपने जवाब दाखिल किए हैं। पिछली बार जब समिति का कार्यकाल बढ़ाया गया था तो विपक्षी सदस्यों खासकर कांग्रेस सदस्यों ने कहा था कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद कहा है कि सरकार भूमि अध्यादेश को पुन: जारी नहीं करेगी जो उस विधेयक पर आधारित है जिसका समिति अध्ययन कर रही है इसलिए समिति के कार्यकाल को बढ़ाने का कोई तुक नहीं है। इस अध्यादेश की मियाद 31 अगस्त को समाप्त हो गई। सरकार ने चौथी बार अध्यादेश जारी नहीं करने का निर्णय किया था।

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