लालू प्रसाद यादव ने उठाए थे 'राजगीर यात्रा' पर सवाल, नीतीश कुमार ने दी यह सफाई - Lalu Prasad Yadav Took up Question on Rajgir Yatra, Nitish Kumar Gave this Answer - Jansatta
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लालू प्रसाद यादव ने उठाए थे ‘राजगीर यात्रा’ पर सवाल, नीतीश कुमार ने दी यह सफाई

नीतीश कुमार ने कहा कि मैंने अपने 43 वर्षों के राजनैतिक जीवन में कभी कोई घटिया बातचीत नहीं की है। कभी किसी पर आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है।

Author पटना | November 6, 2017 7:33 PM
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के सीएम नीतीश कुमार। (फाइल फोटो)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनकी पार्टी से उन पर किए जा रहे प्रहार पर आज कहा कि जो निम्नस्तरीय बात कर रहे हैं वे परेशान और विक्षिप्त लोग हैं, जो सत्ता से वंचित हैं। यहां लोक संवाद कार्यक्रम के बाद राजद प्रमुख लालू प्रसाद द्वारा उनकी राजगीर यात्रा पर टिप्पणी किए जाने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा, ‘‘राजगीर मगध साम्राज्य की राजधानी रही है। यहां मेरी समाधि अगर बन जाती है तो इससे ज्यादा खुशकिस्मती हो ही नहीं सकती है। इन सब जगहों पर अगर निर्वाण मिल जाए तो इससे अच्छी और बडी बात क्या होगी।’’ उन्होंने कहा कि चाहे किसी और भावना से ही सही ‘बड़े भाई’ (लालू यादव) के मुंह से बड़ी अच्छी बात निकल गई है।

नीतीश ने कहा कि वे बचपन से ही राजगीर जाते रहे हैं। पावापुरी में भगवान महावीर के निर्वाण स्थल पर जब मां की गोद में था तब भी वहां जाया करता था। उन्होंने कहा कि जिसका जैसा स्तर होगा उसी तरह की बात करेंगे और इन सब बातों से उन्हें कोई मतलब नहीं है। जदयू-राजद में निम्नस्तरीय आरोप-प्रत्यारोप पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने अपने 43 वर्षों के राजनैतिक जीवन में कभी कोई घटिया बातचीत नहीं की है। कभी किसी पर आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की है। मैं उतने घटिया स्तर पर खुद को नहीं ले जा सकता, वह मेरा स्तर नहीं है। मैंने अपने प्रवक्ताओं को भी कह दिया है कि मुझसे से संबंधित कोई भी घटिया बात करे तो उसका जवाब नहीं दें।’’

उन्होंने कहा कि कोई सहयोगी, साथी या कोई परिचित हो अगर कोई अपराध कर देगा तो क्या उसके लिए जिम्मेदार होंगे। इसी तरह से सरकारी तंत्र में कोई भ्रष्टाचार या अपराध करता है तो कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। उसका कोई बचाव नहीं करेगा। उन्होंने विरोधियों पर उनका नाम लिए बिना कहा कि आप (मीडियाकर्मी) लोग तरह तरह के लोगों से मिलते हैं। जेल के भीतर से भी मिलते हैं, भ्रष्टाचार करने वाले से भी मिलते हैं। अच्छे काम की धज्जियां उड़ाने वाले से भी मिलते हैं। आपसे ज्यादा बेहतर आदमी के स्वभाव को कौन जान सकता है।

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