नीतीश के पुराने साथी ललन सिंह बने जेडीयू चीफ, पार्टी के रहे हैं “क्राइसिस मैनेजर”, केंद्रीय मंत्री बनने से चूके थे

पार्टी अध्यक्ष पद की रेस में ललन सिंह का मुकाबला हाल ही में अपनी पार्टी रालोसपा का जेडीयू में मर्ज कराने वाले उपेंद्र कुशवाहा से था।

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नीतीश के बेहद करीबी माने जाने वाले और उनके पुराने साथी ललन सिंह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। (एक्सप्रेस फोटो)

जनता दल यूनाइडेट के अध्यक्ष पद की रेस में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने सबको पछाड़ दिया। नीतीश के बेहद करीबी माने जाने वाले और उनके पुराने साथी ललन सिंह को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। पिछले दिनों हुए कैबिनेट विस्तार में आरसीपी सिंह को जगह मिलने के बाद से ही नए अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। पार्टी अध्यक्ष पद की रेस में ललन सिंह का मुकाबला हाल ही में अपनी पार्टी रालोसपा का जेडीयू में मर्ज कराने वाले उपेंद्र कुशवाहा से था। शनिवार शाम को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया।

ललन सिंह को अध्यक्ष पद के लिए चुने जाने के बाद जदयू के पटना स्थित दफ्तर में जमकर खुशियां मनाई गई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। ललन सिंह को अध्यक्ष चुने जाने के बाद जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि इस निर्णय के लिए मैं नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। इससे पार्टी को फायदा होगा और यह पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा संकेत है। इसलिए इसे जाति के मामले से न जोड़ कर देखा जाए।

आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्री बनने से खाली हुआ था पद: पिछले साल दिसंबर महीने में ही पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर आरसीपी सिंह को बिठाया था। तमाम सियासी समीकरणों को साधते हुए उनको पार्टी में शीर्ष नेतृत्व का दर्जा दिया गया था लेकिन हाल ही में केंद्रीय मंत्री बनाए गए हैं। मंत्री बनने के बाद वह पार्टी के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे, ऐसे में पार्टी को एक बार फिर नए अध्यक्ष की तलाश करनी पड़ी।

कौन है ललन सिंह: राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को कर्पूरी ठाकुर का शिष्य माना जाता है। वर्तमान में मुंगेर लोकसभा सीट से जेडीयू के सांसद, नीतीश कुमार के संपर्क में 1970 के दशक में आए थे। ललन सिंह उन लोगों में शुमार हैं जिनके साथ मिलकर नीतीश कुमार ने जेडीयू पार्टी का बीज बोया था। लालू के खिलाफ और शरद यादव की नाराजगी मोल लेते हुए नीतीश ने जब अलग पार्टी बनाने की ठानी थी तो ललन सिंह, नीतीश कुमार के साथ थे। तब से वह नीतीश के साथ जुड़े हुए हैं, बीच में कुछ सालों के लिए दोनों के बीच मनमुटाव हुआ था लेकिन यह भी ज्यादा दिन नहीं चला था।

नीतीश कुमार के संकट मोचक: ललन सिंह ने नीतीश कुमार के लिए कई बार संकट मोचक की भूमिका निभाई है। सियासी गलियारों में ऐसा भी कहा जाता है कि लोजपा के पशुपति कुमार से ललन सिंह ने ही चर्चा की थी। जिसके बाद पार्टी में बगावत के बीज फूटे थे। कई मौकों पर ललन सिंह नीतीश कुमार को मजबूती दे चुके हैं।

केंद्री मंत्री बनने से चुके थे: पिछले दिनों मोदी कैबिनेट फेरबदल की चर्चा में ललन सिंह का नाम केंद्रीय मंत्री बनाए जाने की अटकलों में देखा जा रहा था लेकिन आखिरी समय में किसी कारणवश उनको केंद्रीय मंत्री नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में उन्हें अध्यक्ष बनाकर इस खालीपन को भरने की कवायद की जा रही है।

कुशवाहा पर क्यों भारी पड़े ललन सिंह: जेडीयू किसी ऐसे नेता को पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहता था जिसके खिलाफ पार्टी के अंदर से विरोध के सुर सुनाई न दें। कुशवाहा, रालोसपा का विलय कराने के बाद जेडीयू में शामिल हुए हैं, उनके पार्टी चीफ बनाने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी हो सकती थी, ऐसे में शीर्ष नेतृत्व ने कोई रिस्क लेना उचित नहीं समझा।

 

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