राकेश टिकैत ने भाजपा सांसद को बताया ‘चोर’, बोले- ये सरकार माफिया और गुंडों को बना देती है मंत्री

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि समझौते में वो ही नहीं, कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि मारे गए किसानों के परिवारों की सहमति से ही सरकार से समझौता हुआ है। टिकैत ने कहा कि प्रशासन ने मांगें पूरी करने के लिए सात दिन का समय मांगा है, उसके बाद हमलोग मिलकर निर्णय लेंगे।

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किसान नेता राकेश टिकैत (फाइल फोटो- पीटीआई)

लखीमपुर खीरी मामले में देश के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके बेटे पर किसान नेता लगातार गंभीर आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। किसानों और सरकार के बीच इस मामले में समझौता कराने वाले किसान नेता राकेश टिकैत ने अजय मिश्रा को ‘चोर’ तक कह दिया है।

एक टीवी कार्यक्रम में बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि ये सरकार माफिया और गुंडों को मंत्री बना देती है। भाजपा सांसद चोर है। अजय मिश्रा का नाम भी एफआईआर में है। टिकैत इस समझौते को लेकर भी सवालों के घेरे में हैं। न्यूज 24 के साथ बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा- “ये गृहमंत्री…ये सरकारें देख कर मंत्री नहीं बनाती कि ये कौन है। ये खैर और चंदन का चोर था, ये लकड़ी काटकर बेचता था। नेपाल में इसके तीन पेट्रोल पंप है। डीजल नेपाल से भारत में जाता है। वहां पर 15-20 रुपये सस्ता है। ये डीजल का अवैध चोरी करता है। ये खाद की चोरी करता था। ये तो चोर आदमी था। ये तो माफिया है, गुंडा है”।

इसके बाद ऐंकर ने जब समझौते को लेकर सवाल उठाया तो टिकैत ने कहा कि वहां पर सारे लोग थे, जितने लोकल के लोग हैं, जो भी वहां पर थे। सभी समझौते में शामिल हैं। उनके परिवार शामिल हैं। हम कोई सरकार के साथ में हैं? हम किसान के साथ में हैं। टिकैत ने आगे कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भोग तक का टाइम दिया है। राज्य गृहमंत्री को सस्पेंड करने की हमने मांग की है। भोग के बाद हम यहां पर आएंगे फिर निर्णय लेंगे।

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि प्रशासन ने सबसे एक हफ्ते का टाइम मांगा है। वीडियो की बात करते हुए टिकैत ने कहा कि हमारे पास और भी वीडियो हैं। यहां इंटरनेट बंद है। जो वीडियो अभी आए हैं वो तो कोई जाकर बाहर से डाला है। अभी बहुत वीडियो हैं। टिकैत ने आगे एक और खुलासा करते हुए कहा कि आरोपियों ने पहले पुलिस वालों पर ही गाड़ी चढ़ाई थी, पुलिस वाले बता नहीं रहे हैं।

बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा में कुल आठ लोगों की मौत हो गई है। इस हिंसा में चार किसान, तीन बीजेपी कार्यकर्ता और एक स्थानीय पत्रकार की मौत घिसटने, चोट लगने, और ब्रेन हैमरेज के कारण हुई थी। मृतकों के शरीरों पर घाव के कई निशान मिले हैं। हिंसा के बाद किसानों और राज्य सरकार के बीच अब समझौता भी हो चुका है। राकेश टिकैत के अनुसार सरकार ने पूरी कार्रवाई के लिए सात दिनों का समय मांगा है।

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