अमेठी के नए जिला अस्‍पताल में दवा का अभाव, डाॅ. नहीं होने से इलाज के लिए दर-दर भटकने को रोगी मजबूर

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी के नए जिला चिकित्सालय के भंडार में दवा अमूमन खत्‍म हो गई है।

बच्‍चे का इलाज करते डाक्‍टर।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी के नए जिला चिकित्सालय के भंडार में दवा अमूमन खत्‍म हो गई है। अब रोजाना हजारों मरीजों को दवा बाहर से खरीदनी पड़ेगी। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष दुबे ने स्वास्थ्य निदेशक लखनऊ को पत्र भेजा था पर दवा खरीदने की अनुमति नहीं दी गई। जानकारी के अनुसार अस्पताल के फंड में पचास लाख रुपए जमा है। जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ प्रवीण अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय ने अमेठी के जिला चिकित्सालय को डीडीओ कोड नंबर दिया नहीं है। इसलिए दवा की खरीदारी नहीं हो सकती है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौरीगंज के फंड से अब तक जिला चिकित्सालय चल रहा था पर अब उसका भी बजट खत्म हो चुका है। 15 नवंबर के बाद मरीजों के लिए दवा का इंतजाम नहीं है। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय उधारी पर चल रहा था। लेकिन अब बंदी के कगार पर है। तीन महीने से सीएमएस की तैनाती है। लेकिन अधिकार शून्य के बराबर है। अग्रवाल ने बताया कि जिला चिकित्सालय में दुराचार की धारा 376 के परीक्षण करने के लिए महिला रोग विशेषज्ञ तक नहीं है। सर्जन और महिला डॉक्टर के सभी पद खाली पड़े हैं।

जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ लाइक ने बताया कि जिला चिकित्सालय में करीब पांच हजार रुपए रोज के खर्चे हैं। लेकिन सीएमएस के पास आहरण वितरण का अधिकार नहीं है, जिससे डाक्टरों को ओपीडी के फुटकर खर्चे जेब से भरने पड़ते हैं। उन्‍होंने बताया कि छोटे बच्चों में डेंगू वायरस के मामले न के बराबर है। लेकिन सावधानी बरतने की जरूरत है। मौसम परिवर्तन के कारण छोटे बच्चों को निमोनिया और डायरिया का खतरा ज्यादा होता है। बाकी सर्दी-जुकाम, बुखार डायरिया, चर्म रोग और निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं में खान-पान की कमी के कारण छोटे बच्चों में प्रोटीन और हार्मोन्स की कमी ज्यादा है। ज़िले में महिला रोग विशेषज्ञ के सभी 18 पद खाली पड़े हैं। इसके बाद सर्जन के सभी 17 पद खाली हैं, जिससे अमेठी की महिला मरीजों को सामान्य इलाज के लिए भी लखनऊ, इलाहाबाद और दिल्ली जाना पड़ता है।

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