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लॉकडाउन में सीएम ने करवाया था एयरलिफ्ट, डेढ़ हजार से ज्यादा मजदूर ज्यादा पैसे और बेहतर भविष्य का सपना ले फिर चले गए लद्दाख

आमतौर पर बाहरी राज्यों में मजदूर मुहैया कराने के लिए बिचौलियों की मदद ली जाती थी, लेकिन इस बार झारखंड सरकार ने ही बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन से रोजगार पर बात की है।

Author रांची | Updated: June 14, 2020 8:50 AM
Migrant, Labourers, Jharkhand, Ladakhझारखंड से लद्दाख ले जाए जा रहे मजदूरों से उनके अनुभव और कौशल के आधार पर 15 हजार से लेकर 29 हजार तक की तनख्वाह का वादा किया गया है। (फोटो- प्रेम नाथ पांडे)

कोरोनावायरस के चलते लगे लॉकडाउन का सबसे बुरा असर अब तक प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है। लाखों की संख्या में लोग अपने काम वाले शहरों से निकल कर हजारों किमी का सफर कर घर पहुंचे, लेकिन वहां भी उनके पास किसी ढंग के रोजगार की व्यवस्था नहीं है। हालांकि, इस बीच झारखंड के मजदूर फिर से कमाई और रोजगार पाने के मकसद से लद्दाख के लिए निकल चुके हैं। दरअसल, लद्दाख पर सड़कों और इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में जुटी बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने झारखंड सरकार से काम जारी रखने के लिए मजदूरों की मांग की है। BRO ने वादा किया है कि वह इन मजदूरों को ज्यादा तनख्वाह देगी। इसी ज्यादा कमाई की आस में श्रमिक एक बार फिर घरों को छोड़कर काम के लिए दूसरे राज्य जाने के लिए तैयार हुए हैं।

दुमका रेलवे स्टेशन पर लद्दाख जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे शेख शब्बीर से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि पहले उनकी कमाई महीने में सिर्फ 13,600 रुपए ही थी। हालांकि, अब बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने उन्हें 18,100 रुपए देने का वादा किया है। यह उनकी कमाई में सीधे तौर पर 4500 रुपए की बढ़ोतरी है, जिससे वे अपने परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा और खाने के लिए ज्यादा खर्च कर सकेंगे। 20 साल के शब्बीर उन 1648 प्रवासी मजदूरों में शामिल हैं, जिन्हें शनिवार को ही ट्रेन से लद्दाख के लिए रवाना कर दिया गया।

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खास बात यह है कि इन मजदूरों को लद्दाख भेजने से पहले ही झारखंड सरकार ने सीधे तौर पर BRO के साथ डील कर ली। दरअसल, पहले BRO मजदूरों के लिए बिचौलियों पर निर्भर था। कई बार मजदूरों को भी रोजगार के लिए इन्हीं बिचौलियों की मदद लेनी पड़ती थी। हालांकि, काम के दौरान इन बिचौलियों द्वारा मजदूरों का उत्पीड़न काफी आम हो गया था। उन्हें इसके लिए अपने एटीएम कार्ड तक सरेंडर करने पड़ते थे। लेकिन झारखंड सरकार ने मजदूरों को सीधे ही काम के लिए भेजने का फैसला किया, जिससे अब बिचौलियों का काम खत्म हो गया है।

बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने मजदूरों को सीधे पैसे देने के साथ एक एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत अगले साल इन सभी मजदूरों को इंटरस्टेट वर्कमेन एक्ट के तहत रजिस्टर किया जाएगा, जिससे उनकी सुरक्षा बढ़ेगी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि लंबे समय से बिचौलिए मजदूरों का फायदा उठाते रहे हैं। मैं खुद एक किसान और मजदूर का बेटा हूं, इसलिए अब किसी का उत्पीड़न नहीं होगा। बता दें कि सीएम सोरेन लॉकडाउन लगने के बाद इन मजदूरों को एयरलिफ्ट कर के राज्य में वापस लाए थे।

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