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कुंभ या अर्धकुंभ? नाम पर छिड़ी बहस, योगी ने दिया तर्क तो धर्मगुरु बोले ये परंपरा के खिलाफ

'सरकार को अर्धकुंभ पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कुंभ का भी नाम बदल दिया। उनके पास न तो इतिहास की जानकारी है और न ही परंपरा की।'

Author January 9, 2019 11:14 AM
योगी आदित्यनाथ (एक्सप्रेस फाइल फोटो/ विशाल श्रीवास्तव

प्रयागराज में 15 जनवरी से शुरू हो रहा धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का समागम कुंभ है या अर्धकुंभ इसे लेकर बहस छिड़ गई है। करोड़ों लोगों की शिरकत का गवाह बनने वाला यह मेला 4 मार्च तक चलेगा। हर 12 साल में यहां कुंभ और 144 साल बाद महाकुंभ का आयोजन होता है। लेकिन इस बार इसके नाम को लेकर विवाद हो रहा है। इसकी शुरुआत 12 दिसंबर 2017 को उस समय हुई जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुंभ का लोगो लॉन्च किया था। उस समय उन्होंने अर्धकुंभ को कुंभ बताया था। 22 दिसंबर को राज्य विधानसभा योगी सरकार ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण बिल पेश किया था। तभी उन्होंने इस बदलाव का भी ऐलान किया था।

‘सरकार वेदों से कर रही छेड़छाड़’: योगी सरकार का यह बदलाव न तो विपक्ष स्वीकार कर रहा है और न ही धर्म से जुड़ी बड़ी हस्तियां। वे अभी भी छह साल बाद आने वाले इस कार्यक्रम को अर्धकुंभ ही कहने पर अड़े हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2 जनवरी को एक ट्वीट कर कहा था, ‘सरकार को अर्धकुंभ पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कुंभ का भी नाम बदल दिया। उनके पास न तो इतिहास की जानकारी है और न ही परंपरा की।’ वहीं नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने कहा कि सरकार वेदों और पवित्र शास्त्रों से छेड़छाड़ कर रही है।

योगी ने दिया जवाब, पीएम बोले- अर्धकुंभः वहीं विपक्ष को जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ ने यजुर्वेद के मंत्रों का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि हिंदू दर्शन में कुछ भी अपूर्ण नहीं है। इसीलिए ‘अर्ध’ शब्द सही नहीं है। उल्लेखनीय है कि योगी के उलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रयागराज में हुई एक रैली में अर्धकुंभ शब्द का ही इस्तेमाल किया था। दूसरी तरफ पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत महेश्वर दासजी ने कहा कि सरकार का ‘कुंभ’ हमारे लिए ‘अर्ध कुंभ’ ही रहेगा। अति विष्णु महायज्ञ समिति के प्रमुख बालक योगेश्वर दास महाराज ने भी योगी की टिप्पणी को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- ‘कार्यक्रम को बड़ा दिखाने के लिए शब्दों से खेल कर दिया गया। लेकिन सनातन धर्म शास्त्रों में लिखी बातों को मानता है जिन्हें बदला नहीं जा सकता।’

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