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Kumbh: अखाड़ों में सबसे बड़ा अखाड़ा है जूना, डॉक्टर्स से वकील तक निरंजनी अखाड़े में हैं शामिल

15 जनवरी से प्रयागराज में कुंभ शुरू हो रहा है। बता दें कि दुनिया के कुछ बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में से एक है कुंभ।

Author Updated: December 29, 2018 6:21 PM
प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- द फाइनेंशियल एक्सप्रेस

15 जनवरी से प्रयागराज में कुंभ शुरू हो रहा है। बता दें कि दुनिया के कुछ बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में से एक है कुंभ। इस मेले को यूनेस्को की भी मान्यता मिल चुकी है। कुंभ मेले की तारीख के साथ ही शाही स्नान की तारीखें भी सामने आ चुकी हैं। गौरतलब है कि 4 मार्च को शिवरात्रि के साथ ही मेले का समापन हो जाएगा। कुंभ में शाही स्नान के साथ ही साधुओं के अखाड़े भी काफी सुर्खियों में रहते हैं। बता दें कि इन अखाड़ों में डॉक्टर से लेकर प्रोफेसर भी शामिल रहते हैं।

शंकराचार्य ने की थी स्थापना: ऐसा कहा जाता है कि कुंभ में आने वाले कई अखाड़ों में से 7 की स्थापना शंकराचार्य ने खुद की थी। ये अखाड़े थे- महानिर्वाणी, निरंजनी, जूना, अटल, आवाहन, अग्नि और आनंद।

सबसे बड़ा अखाड़ा है जूना अखाड़ा: मान्यताओं के मुताबिक इन अखाड़ों के विचार काफी अलग अलग होते हैं। वहीं इन सभी अखाड़ों में सबसे बड़ा अखाड़ा होता है जूना अखाड़ा। इसके बाद निरंजनी और महानिर्वाणी अखाड़ा आते हैं।

निरंजनी अखाड़े का इतिहास: जानकारी के मुताबिक निरंजनी अखाड़े की स्थापना सन् 904 में विक्रम संवत 960 कार्तिक कृष्णपक्ष दिन सोमवार को गुजरात की मांडवी नाम की जगह पर हुई थी। महंत अजि गिरि, मौनी सरजूनाथ गिरि, पुरुषोत्तम गिरि, हरिशंकर गिरि, रणछोर भारती, जगजीवन भारती, अर्जुन भारती, जगन्नाथ पुरी, स्वभाव पुरी, कैलाश पुरी, खड्ग नारायण पुरी, स्वभाव पुरी ने मिलकर अखाड़ा की नींव रखी। अखाड़ा का मुख्यालय तीर्थराज प्रयाग में है। उज्जैन, हरिद्वार, त्रयंबकेश्वर व उदयपुर में अखाड़े के आश्रम हैं।

पढ़े लिखों का अखाड़ा है निरंजनी: एक अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक शैव परंपरा के निरंजनी अखाड़े के करीब 70 फीसदी साधु- संतो ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है। इन पढ़े लिखों में डॉक्टर, वकील, प्रोफेसर, संस्कृत के विद्वान तक शामिल हैं।

नेट क्वालिफाइड हैं संत स्वामी आनंदगिरि: जानकारी के मुताबिक इस अखाड़े के एक संत स्वामी आनंदगिरि नेट क्वालिफाइड हैं वो फिलहाल में आईआईटी खड़गपुर, आईआईएम शिलॉन्ग में लेक्चर दे चुके हैं। वहीं अभी वो बनारस से पीएचडी कर रहे हैं। गौरतलब है कि फिलहाल इस अखाड़े में दस हजार से अधिक नागा संन्यासी हैं। जबकि महामंडलेश्वरों की संख्या 33 है। वहीं महंत और श्रीमहंत की संख्या एक हजार से अधिक है।

कब शुरू होगा कुंभ: बता दें कि मकर संक्रांति के दिन (15 जनवरी) से कुंभ मेले की शुरुआत होगी। इसके साथ ही 4 मार्च को महाशिवरात्रि के साथ ही इस मेले का आखिरी स्नान आयोजन होगा। यानि करीब 50 दिनों तक कुंभ में स्नान का अवसर रहेगा। गौरतलब है कि हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज में ही कुंभ और अर्धकुंभ का आयोजन होता है। जिसमें नासिक में गोदावरी नदी के तट पर, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर, हरिद्वार और प्रयाग में गंगा नदी के तट पर आयोजन होता है। वहीं सबसे बड़ा मेला कुंभ 12 सालों के अंतर में तो वहीं 6 वर्षों के अंतर में अर्ध कुंभ के नाम से मेले का आयोजन होता है।

 

किस तारीख को होगा शाही स्नान: कुंभ 15 जनवरी से 4 मार्च तक चलेगा। इस दौरान हर दिन स्नान होगा। लेकिन कुंभ में शाही स्नान की काफी अहमियत होती है। ऐसे में बता दें कि 15 जनवरी को पहला शाही स्नान, 04 फरवरी को दूसरा शाही स्नान और 10 मार्च को तीसरी शाही स्नान होगा।

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