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Kumbh Mela 2019 : दूसरा शाही स्नान शुरू, दोपहर 2 बजे तक 3 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी

Kumbh Mela 2019 Prayagraj (Allahabad): सोमवती-मौनी अमावस्या और महादेय योग के अद्भुत संयोग पर कुंभ मेले में दूसरा प्रमुख शाही स्नान शुरू हो गया है। आस्था की डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंच चुके हैं। सबसे पहले महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के साधुओं ने संगम में डुबकी लगाई।

Author February 4, 2019 2:34 PM
Kumbh Mela 2019: प्रयागराज कुंभ में शाही स्नान (फोटोः कुमारसंभव)

Kumbh Mela 2019 : सोमवती-मौनी अमावस्या और महादेय योग के अद्भुत संयोग पर कुंभ मेले में दूसरा प्रमुख शाही स्नान शुरू हो गया है। आस्था की डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु संगम तट पर पहुंच चुके हैं। सबसे पहले महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के साधुओं ने संगम में डुबकी लगाई। मेला प्रभारी विजय किरण आनंद का कहना है कि माघी (मौनी) अमावस्या पर दोपहर 2 बजे तक करीब 3 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम स्नान किया। उन्होंने बताया कि भीड़ पर नियंत्रण करने के लिए 41 घाट बनाए गए हैं।

40 मिनट में शाही स्नान करेगा हर अखाड़ा : मेला प्रशासन के मुताबिक, कुंभ मेले में 13 प्रमुख अखाड़े हैं। इनके लिए शाही स्नान का वक्त तय कर दिया गया है। सोमवार सुबह सबसे पहले महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के साधु-संन्यासी संगम तट पर पहुंचे और 6:15 बजे उन्होंने शाही स्नान शुरू कर दिया। मेला प्रशासन की मानें तो हर अखाड़े को शाही स्नान के लिए 40 मिनट का वक्त दिया गया है।

गंगा की गोद खेलने लगे साधु : शाही स्नान के लिए संगम तट पर पहुंचे साधु अपने रथों से उतरने के बाद गंगा नदी की तरफ दौड़ने लगे। कई साधुओं ने संगम में ऐसे छलांग लगाई, जैसे कोई बच्चा अपनी मां की गोद में किलकारियां भरता है। साधु काफी देर तरह त्रिवेणी में अठखेलियां करते रहे। एक साधु ने बताया कि शाही स्नान के वक्त वे लोग अमरत्व का पान करते हैं। इस दिव्य घड़ी में आकाश मार्ग से अमृत बरसता है, जो उन्हें दिव्य अनुभूति देता है।

खास है यह अद्भुत संयोग : उन्होंने बताया कि माघ मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्था को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन कुंभ के पहले तीर्थंकर ऋषभ देव ने लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और संगम के पवित्र जल में स्नान किया था। सनातन हिंदू धर्म में हर अमावस्या का खास महत्व है। इस बार सोमवती और मौनी अमावस्या पर महोदय योग का अद्भुत संयोग भी है। वहीं, श्रवण नक्षत्र, वियातिपात योग और सर्वार्थ सिद्धि योग की भी निष्पत्ति हो रही है। कुंभ होने से इनका महत्व और भी बढ़ गया है।

कुंभ मेले का एक दृश्य। (Photo: PTI)

इस क्रम में शाही स्नान करेंगे अखाड़े : सबसे पहले सुबह 6:15 बजे श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री पंचायती अटल अखाड़ा के साधुओं ने शाही स्नान किया। इसके बाद 7:05 बजे श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े और तपोनिधि श्री पंचायती आनंद अखाड़े के साधु-संत संगम में डुबकी लगाई। 8 बजे का समय श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंच दशनाम आह्वान अखाड़ा और श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा के लिए तय था। 10:40 बजे के शुभ योग में अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अनी अखाड़े के साधु-संन्यासी शाही स्नान किया। इनके बाद 11:20 बजे अखिल भारतीय श्री दिगंबर अनी अखाड़ा, 12:20 बजे अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा, 13:15 बजे श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, 14:20 बजे श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन और 15:40 बजे श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला के संन्यासी त्रिवेणी में अमरत्व का पान किया।

कुंभ में कुल 6 स्नान, इनमें 3 शाही स्नान : मेला प्रशासन के मुताबिक, कुंभ मेले में कुल 6 पवित्र स्नान का कार्यक्रम तय किया गया है। इनमें 3 शाही स्नान हैं। पहला शाही स्नान मकर संक्रांति पर 15 जनवरी को हुआ था। वहीं, दूसरा पवित्र स्नान पौष पूर्णिमा के दौरान 21 जनवरी को हुआ। 4 फरवरी को मौनी अमावस्या पर दूसरा शाही स्नान हो रहा है। वहीं, 10 फरवरी को वसंत पंचमी पर तीसरा शाही स्नान (कुल चौथा) होगा। 19 फरवरी को माघ पूर्णिमा पर पांचवां और 4 मार्च को महाशिवरात्रि पर छठा पवित्र स्नान होगा।

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