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Kumbh Mela 2019 : कुंभ मेले में राजनीति की बयार, श्रद्धालु लगाते हैं Vote For Modi के नारे

Kumbh Mela 2019 Prayagraj (Allahabad) : प्रयागराज में कुंभ 2019 का आयोजन धर्म और आस्था के लिए हो रहा है, लेकिन यहां से राजनीतिक हित साधने की तैयारी भी चल रही है। पहले शाही स्नान के बाद साधु-संतों की टोली में ज्यादातर चर्चा अयोध्या में राम मंदिर को लेकर होती है।

Author Updated: January 24, 2019 3:52 PM
Kumbh Mela 2019: प्रयागराज कुंभ में शाही स्नान (फोटोः कुमारसंभव)

Kumbh Mela 2019 : प्रयागराज में कुंभ 2019 का आयोजन धर्म और आस्था के लिए हो रहा है, लेकिन यहां से राजनीतिक हित साधने की तैयारी भी चल रही है। पहले शाही स्नान के बाद साधु-संतों की टोली में ज्यादातर चर्चा अयोध्या में राम मंदिर को लेकर होती है। हालात ऐसे में हैं कि श्रद्धालुओं की कई टोली वोट फॉर मोदी के नारे भी लगाती हैं। इस संबंध रोज बयानबाजी भी हो रही है। आरएसएस के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी 2025 तक राम मंदिर बनने की बात कहकर मोदी सरकार पर तंज कस चुके हैं। वहीं, 20 जनवरी को वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने मैनिफेस्टो में राम मंदिर का मुद्दा शामिल करने पर कांग्रेस को समर्थन देने पर विचार करने की बात तक कह डाली। हालांकि, बाद में वे अपने बयान से मुकर गए।

राम मंदिर को लेकर की प्रतिज्ञा : बता दें कि नागा साधु धूनी रमाने के दौरान बम-बम भोले और हर-हर महादेव जैसे जोशीले नारे लगाते नजर आते हैं। वहीं, कुछ साधु ऐसे भी हैं, जो राम मंदिर बनने तक हाथ ऊपर रखने या खड़े रहने जैसी प्रतिज्ञा कर चुके हैं। ऐसे में कई श्रद्धालु सुबह व शाम के वक्त वोट फॉर मोदी के नारे भी लगाते हैं। श्रद्धालु भी उनकी बातों को दोहराते हुए नारेबाजी करते हैं। वहीं, कुछ साधु भी मोदी को वोट देने की अपील कर चुके हैं।

राम मंदिर पर होती है चर्चा : गौरतलब है कि कुंभ मेला एरिया के सेक्टर-15 में बने बड़े-बड़े अखाड़ों के साधु-संत राम मंदिर के बारे में चर्चा करने पर काफी रुचि दिखाते हैं। उनका मानना है कि जब केंद्र में मोदी सरकार बनी थी तो उम्मीद जग उठी थी कि इस बार राम मंदिर जरूर बन जाएगा।

पीएम के इस बयान से नाराजगी : एक इंटरव्यू के दौरान न्याय प्रणाली का पालन करने के मोदी के बयान से उन्हें निराशा हुई है। साधुओं का कहना है कि राम मंदिर बनाने के लिए इससे उपयुक्त समय और कोई नहीं था। मोदी को आगामी चुनाव में इसका खमियाजा भुगतना पड़ सकता है और जनता की नाराजगी का सामना भी करना पड़ सकता है।

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