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Kumbh: 15 जनवरी से शुरु होगा महोत्सव, जानें क्या हैं शाही स्नान की तारीखें

जनवरी 2019 में प्रयागराज में अर्धकुंभ का आयोजन किया जाएगा। कुंभ में स्नान का काफी महत्व होता है। माघ महीने के प्रथम दिन, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है (मकर संक्रांति) से प्रयागराग कुंभ की शुरुआत होती है।

कुंभ में स्नान लेते श्रद्धालु, फोटो सोर्स- kumbh.gov.in

जनवरी 2019 में प्रयागराज में अर्धकुंभ का आयोजन किया जाएगा। कुंभ में स्नान का काफी महत्व होता है। माघ महीने के प्रथम दिन, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है (मकर संक्रांति) से प्रयागराग कुंभ की शुरुआत होती है। मेले में शाही स्नान इस महोत्सव का केन्द्रीय आकर्षण होता है। इसे मेले का सबसे जरूरी हिस्सा भी बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शाही स्नान के बाद सारे पाप धुल जाते हैं।

कब शुरू होगा कुंभ: बता दें कि मकर संक्रांति के दिन (15 जनवरी) से कुंभ मेले की शुरुआत होगी। इसके साथ ही 4 मार्च को महाशिवरात्रि के साथ ही इस मेले का आखिरी स्नान आयोजन होगा। यानि करीब 50 दिनों तक कुंभ में स्नान का अवसर रहेगा। गौरतलब है कि हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज में ही कुंभ और अर्धकुंभ का आयोजन होता है। जिसमें नासिक में गोदावरी नदी के तट पर, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर, हरिद्वार और प्रयाग में गंगा नदी के तट पर आयोजन होता है। वहीं सबसे बड़ा मेला कुंभ 12 सालों के अंतर में तो वहीं 6 वर्षों के अंतर में अर्ध कुंभ के नाम से मेले का आयोजन होता है।

किस तारीख को होगा शाही स्नान: कुंभ 15 जनवरी से 4 मार्च तक चलेगा। इस दौरान हर दिन स्नान होगा। लेकिन कुंभ में शाही स्नान की काफी अहमियत होती है। ऐसे में बता दें कि 15 जनवरी को पहला शाही स्नान, 04 फरवरी को दूसरा शाही स्नान और 10 मार्च को तीसरी शाही स्नान होगा।

इस बार दोगुना हुआ है क्षेत्र: प्रयागराज की महापौर अभिलाषा नंदी का कहना है कि इस बार कुंभ मेले का क्षेत्र दोगुने से भी अधिक हुआ है। जहां पिछली बार वो 15-20 किलोमीटर क्षेत्र में फैला था तो वहीं इस बार उसका क्षेत्र 45 किलोमीटर रहेगा। इसके साथ ही अक्षयवट तक जाने के लिए अच्छी सड़क का भी इंतजाम किया जा रहा है। ताकि भक्तों को कोई दिक्कत न हो।

सरस्वती कूप के भी होंगे दर्शन: इस बार न सिर्फ अक्षयवट के दर्शन हो सकेंगे बल्कि इसके साथ ही सरस्वती कूप के भी दर्शन संभव होंगे। मान्यताओं के मुताबिक सरस्वती कूप पृथ्वी का सबसे पवित्र कुआं है। मान्यता है कि संगम जो अदृश्य सरस्वती है वो इस ही कूप में वास करती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक ऐसा पहली बार होगा जब श्रद्धालु शहर में जल मार्ग, थल मार्ग और हवाई मार्ग से आ पाएंगे।

 

2019 के बाद कहां होगा कुंभ: बता दें कि 2019 के बाद साल 2022 में हरिद्वार में कुंभ मेला होगा और साल 2025 में फिर से प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होगा और साल 2027 में नासिक में कुंभ मेला लगेगा।

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