ताज़ा खबर
 

Kumbh Mela 2019: पहला शाही स्नान आज, जिसके लिए कभी खून तक बहा देते थे साधु-संत

Kumbh Mela 2019 Prayagraj (Allahabad): आज 15 जनवरी 2019 को सूरज की पहली किरण के साथ शाही स्नान का दौर शुरू हुआ और कुंभ मेले का आगाज हो गया। इसके तहत सुबह 6:15 बजे शाही स्नान शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक जारी रहेगा।

Author Updated: January 15, 2019 3:46 PM
प्रयागराज: शाही स्नान लेते अखाड़, फोटो सोर्स- कुमार सम्भव जैन

Kumbh Mela 2019: प्रयागराज से कुमार सम्भव जैन : आज 15 जनवरी 2019 को सूरज की पहली किरण के साथ शाही स्नान का दौर शुरू हुआ और कुंभ मेले का आगाज हो गया। इसके तहत सुबह 6:15 बजे शाही स्नान शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान सभी अखाड़ों के स्नान का क्रम और नहाने की जगह तक निर्धारित कर दी गई है। हालांकि, पहले ऐसा नहीं होता था। शाही स्नान को लेकर साधुओं के बीच खून-खराबा भी हुआ है।

शाही स्नान के बारे में यह जानकारी ही नहीं : जूना अखाड़ा 13 मढ़ी के महंत बालानंद गिरि के मुताबिक, शाही स्नान कब से शुरू हुआ, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। माना जाता है कि 14वीं से 16वीं शाही स्नान की शुरुआत हुई। यह वो दौर था, जब देश पर मुगलों के आक्रमण की शुरुआत हो चुकी थी। उनसे बचने के लिए हिंदू शासकों ने अखाड़े के साधुओं व खासकर नागा साधुओं से मदद करने की अपील की थी।

इसलिए शुरू हुआ शाही स्नान : कहा जाता है कि नागा साधु धर्म को राष्ट्र से भी ऊपर मानते थे। ऐसे में मध्यकालीन हिंदू शासकों ने नागा साधुओं के साथ बैठक की और साधुओं को खास महसूस कराने के मकसद से कुंभ स्नान का सबसे पहले लाभ उन्हें देने की व्यवस्था लागू कर दी गई। इस स्नान के दौरान साधुओं का वैभव राजाओं जैसा होता था, जिसके चलते इसे शाही स्नान का नाम दिया गया।

इस वक्त से शाही स्नान में हुआ खून-खराबा : जानकारों का मानना है कि शाही स्नान को लेकर विभिन्न अखाड़ों में संघर्ष भी हुआ। कहा जाता है कि 1310 में महानिर्वाणी अखाड़े और रामानंद वैष्णव अखाड़े के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। उस दौरान दोनों अखाड़ों में झगड़ा इतना बढ़ा कि नदी का पानी लाल हो गया था। वहीं, 1760 में भी स्नान को लेकर शैव और वैष्णवों के बीच जंग होने की जानकारी है। इसके बाद विभिन्न अखाड़ों के शाही स्नान का क्रम तय किया गया, जिसके मुताबिक आज भी कार्यक्रम तय होता है।

शाही स्नान में क्या होता है : इसमें विभिन्न अखाड़ों से ताल्लुक रखने वाले साधु-संत सोने-चांदी की पालकियों, हाथी-घोड़े पर बैठकर स्नान के लिए पहुंचते हैं. सब अपनी-अपनी शक्ति और वैभव का प्रदर्शन करते हैं. इसे राजयोग स्नान भी कहा जाता है, जिसमें साधु और उनके अनुयायी पवित्र नदी में तय वक्त पर डुबकी लगाते हैं. माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में डुबकी लगाने से अमरता का वरदान मिल जाता है. यही वजह है कि ये कुंभ मेले का अहम हिस्सा है और सुर्खियों में रहता है. शाही स्नान के बाद ही आम लोगों को नदी में डुबकी लगाने की इजाजत होती है.

आज इस हिसाब से होगा शाही स्नान
06:15 बजे : श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, श्री पंचायती अटल अखाड़ा
07:05 बजे : श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा, तपोनिधि श्री पंचायती आनंद अखाड़ा
08:00 बजे : श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा, श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़ा
10:40 बजे : श्री पंच निर्मोही अनि अखाड़ा
11:20 बजे : श्री पंच दिगंबर अनि अखाड़ा
12:20 बजे : श्री पंच निर्वाणी अनि अखाड़ा
13:15 बजे : श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन
14:20 बजे : श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन
15:40 बजे : निरंजनी अखाड़ा, आनंद अखाड़ा

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 बुलंदशहर गोकशी मामला: तीन आरोपियों पर लगा रासुका, जमानत मुश्किल
2 जम्मू-कश्मीरः ऑनलाइन गेम ‘पबजी’ से बिगड़ा फिटनेस ट्रेनर का मानसिक संतुलन, काम नहीं कर रहा दिमाग
3 कुंभः धूं-धूंकर जल रहे थे टेंट, 5 मिनट में एक्टिव हुई राहत टीम और 45 मिनट में बुझा दी आग