ताज़ा खबर
 

Kumbh Mela 2019: सनातन संस्था ने कहा – मोदी हिंदुत्व के सच्चे नेता तो गौ हत्या रोकें और राम मंदिर बनाएं

Kumbh Mela 2019 Prayagraj (Allahabad): कुंभ मेले के सेक्टर-15 में सनातन संस्था ने हिंदू धर्मांतरण, गौ हत्या जैसे मुद्दों पर प्रदर्शनी लगा रखी है। इस दौरान हमने संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन राजहंस से बात की तो उन्होंने हिंदू, हिंदुत्व, गौरक्षा, धर्मांतरण और राम मंदिर जैसे अहम मुद्दों पर इस तरह अपनी राय रखी।

Author Updated: January 15, 2019 3:34 PM
Kumbh Mela 2019: प्रयागराज: कुम्भ मेला, फोटो सोर्स- कुमार सम्भव जैन

Kumbh Mela 2019: प्रयागराज से कुमार सम्भव जैन : कुंभ मेले के सेक्टर-15 में सनातन संस्था ने हिंदू धर्मांतरण, गौ हत्या जैसे मुद्दों पर प्रदर्शनी लगा रखी है। इस दौरान हमने संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन राजहंस से बात की तो उन्होंने हिंदू, हिंदुत्व, गौरक्षा, धर्मांतरण और राम मंदिर जैसे अहम मुद्दों पर इस तरह अपनी राय रखी।

सवाल : चेतन जी, गौरक्षा पिछले कई साल में बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। पीएम मोदी को भी इस बारे में कई बार बयान देना पड़ा। कुछ लोग गौरक्षा के नाम पर उत्पात करते हैं और हिंसा भी करते हैं। आप इस पूरे प्रकरण को किस तरह देखते हैं? क्या हिंसा जायज है?
नहीं, बिल्कुल नहीं। हिंसा जायज नहीं है, लेकिन जब आस्था की आती है। देखिए, 1947 में भी संविधान सभा में यह प्रश्न उठा था कि गौरक्षा के विषय में कानून बने। साथ ही, यह संविधान के आर्टिकल 48 में बताया गया है कि गौवंश वध बंदी होनी चाहिए। इसके बावजूद आज तक भारत में यह कानून नहीं बना है। यह आस्था का विषय है और इसे संवैधानिक मान्यता भी है तो इसी वजह से 1964 में आंदोलन हुआ। नेहरू के काल में और इंदिरा जी के काल में आंदोलन हुआ। आज मोदी जी के काल में भी वह हो रहा है। स्वाभाविक है, क्योंकि यह आस्था का विषय है। जैसे हम कहते हैं कि मुसलमानों के विषय में और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विषय में कानून वो नहीं बनाते हैं। उसी प्रकार से गौरक्षा का विषय हिंदुओं की आस्था का विषय है। इस पर कानून बनने की आवश्यकता स्वाभाविक है और मोदी जी से अपेक्षा इसलिए होती है, क्योंकि मोदी जी हिंदुत्व के ब्रैंड नेता के रूप में अवतरित हुए हैं। स्वाभाविक अपेक्षा है कि मोदी जी के पास अवसर अधिक हैं। इसीलिए जो आंदोलन चल रहा है और जो विषय चल रहा है, वह स्वाभाविक है। दूसरी बात जो इस विषय में हिंसा हो रही है, उसके लिए कोई दुर्भावना नहीं हो सकती, लेकिन यह हिंसा सरकार की गलत नीतियों के कारण होती है। इसकी जिम्मेदारी सरकार को उठानी चाहिए।

सवाल : उत्तर प्रदेश में जब से योगी जी मुख्यमंत्री बने हैं, तब से गौवंश की खरीद-फरोख्त पर रोक लग गई। उसका नतीजा यह हुआ कि लोगों के घर में गौवंश, जो किसी काम के नहीं रह जाते, जिन्हें बेचा नहीं जा सकता। उन्हें खुलेआम छोड़ दिया जाता है। वे फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे लोगों में काफी नाराजगी है। इस मुद्दे को किस तरीके से देखेंगे कि फसलों के रूप में लोगों की आजीविका खत्म हो रही है?
इस मामले में शासन की जिम्मेदारी यह है कि जो ऐसी गौमाताएं हैं, उनके लिए गौ अभ्यारण्य की परिकल्पना बनाई जाए। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में गौ अभ्यारण्य की नीति बनाई गई है, जिसके अंतर्गत ऐसी ही बीमार गौमाता या बैल होते हैं, उन्हें वहां छोड़ दिया जाता है। उत्तर प्रदेश इतना बड़ा राज्य है, लेकिन यहां एक भी गौ अभ्यारण्य की व्यवस्था नहीं है। इसके कारण यह दिक्कत हो रही है और गौमाता को बेचना धर्मशास्त्र के अनुसार पाप माना गया है। इस वजह से इसका समर्थन हम कदापि नहीं कर सकते और शासन को भी नहीं करना चाहिए।

सवाल : मैं आपकी इस बात से सहमत हूं कि यह शास्त्रों का मत है, लेकिन खासकर उत्तर प्रदेश की बात करें तो पशुओं का व्यापार बड़ी आम चीज है। सदियों से पशुओं के बाजार लगते हैं, जिसमें मवेशियों की खरीद-फरोख्त होती है। तो यह चीज कैसे रोकी जा सकती है?
इसके लिए समर्थ शासन द्वारा समर्थ कानून बनाने की आवश्यकता है। आज योगी शासन उत्तर प्रदेश में समर्थ रूप में दिखाई दे रहे हैं। लोगों की अपेक्षा यह है कि एक समर्थ कानून बने, जिसे कठोर रूप से लागू किया गया। क्योंकि जब तक इम्प्लिमेंटेशन नहीं होगा तो कुछ नहीं होगा। वैसे तो वन्य पक्षियों और पशु-पक्षियों के विषय में कानून देश में बहुत बने हैं, लेकिन इसके बावजूद देश में यह सब हो रहा है। इसी वजह से कठोर कानून के इम्प्लिमेंटेशन की बात जो मैंने बताई, यह जरूरी है। साथ ही, यह योगी शासन द्वारा अपेक्षित है।

सवाल : यह जो अर्द्धकुंभ चल रहा है, इसमें कैसे जागृति फैलाएंगे धर्मांतरण पर, गौरक्षा पर और बाकी विषयों पर?
देखिए, सबसे महत्वपूर्ण यह होता है कि काल के अनुसार धर्म के विषय में जागरण कैसे करना है, यही कुंभ की अपनी विशेषता होती है। जैसे आपने देखा होगा कि कथा के पंडाल में कथावाचक कथा बताते-बताते गौरक्षा, धर्मांतरण आदि विषयों पर अपना प्रबोधन करते हैं। हमने यहां एक छोटी-सी प्रदर्शनी लगाई है, जिसके विषय में धर्म शिक्षा के माध्यम से हम यह कार्य कर रहे हैं। जैसे धर्मांतरण हो या गौ हत्या हो। कुछ संत आंदोलनात्मक प्रारूप के हैं, जो स्वयं अलग-अलग प्रकार के बैनर-झंडे लगाकर और घोषणाएं करके इस आंदोलन में खड़े हो गए हैं। यह अभिनव है और इसके विभिन्न अंग हैं। कुंभ मेला जैसे विभिन्न लोगों को जोड़ता है, वैसे ही विभिन्न जागृतियों के माध्यम इस मेले में अपनाए जाएंगे। सच में बताया जाए तो इस बार संतों की एकता काफी महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है। जैसे राम मंदिर बने, धर्मांतरण बंदी हो या गौ हत्या पर बंदी हो। इन तीनों विषयों पर आज संतगण एकजुट हो रहे हैं। जगह-जगह पर अलग-अलग समुदायों के सम्मेलनों में मैंने देखा कि सारे संत एक वाक्य में बोलते हैं कि हां राम मंदिर बनना चाहिए। हां, गौ हत्या बंदी होनी चाहिए। हां, धर्मांतरण बंदी होनी चाहिए। ये जो प्रारूप है, इससे पहले यह अभिनव चित्रण कभी नहीं देखा। संतों की एकजुटता शायद सरकार पर दबाव बनाएगी। यही कुंभ का फलित होगा।

सवाल : राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर तारीख मिल गई है। क्या ऐसे ही तारीखें मिलती रहेंगी या यह मसला कभी खत्म होगा?

देखिए, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट अपनी दिशा से काम कर रहा है। तारीख पर तारीख यह सुप्रीम कोर्ट क्या किसी भी न्याय प्रणाली की अपनी व्यवस्था है। शासन की बात जब करते हैं मॉडर्न स्टेट की तो मॉर्डन स्टेट को बहुत सारे अधिकार हैं। संविधान ने मॉडर्न स्टेट को काफी अधिकार दिए हैं। हम चाहते हैं कि हिंदू समाज के दबाव तंत्र के द्वारा वर्तमान सरकार यह कार्य कर सकती है। मोदी सरकार इस दृष्टिकोण से पहल करती है तो कानून बनाया भी जा सकता है। अध्यादेश भी लाया जा सकता है। इस माध्यम से राम मंदिर का निर्णय किया जा सकता है। यह इच्छाशक्ति राजनीतिक है। राजनीति यदि चाहे तो यह कर सकती है और राजनीति चाहे कि रामकार्ड खेलना है तो सिर्फ घोषणाएं करेंगे और चुनाव के लिए चले जाएंगे। और वे सच में हिंदुत्ववादी होंगे तो राम मंदिर बनाकर ही चुनाव के लिए जाएंगे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दिल्ली के सीएम केजरीवाल की बेटी का किडनैप करने की धमकी देने वाला हिरासत में, कर रहा था IAS की तैयारी
2 निरक्षर विधवा ने अपने हिस्से की सारी जमीन दान दी, तब खुला गांव में मिशन स्कूल
3 80 साल पहले बनाया था कुत्ते-बिल्लियों के लिए बंगला, अब टूटेगा