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बिहार चुनाव: बिजली के लिए सालों इंतजार किया…अब हर चीज के लिए नहीं कर सकते, बोले 30 साल से जंग लड़ रहे गांव के लोग

भागलपुर का यह गांव अकसर चर्चा में रहता है। यहां बड़ी संख्या में लोग पुलिस या आर्मी में तो हैं ही साथ ही हिंसक झड़प और हत्या के मामले भी सामने आ चुके हैं। अप्रैल 1991 में बिजली के खंभों को लेकर यहां हिंसा हुई थी। अब तक इन गावों में 20 लोगों की हत्या हो चुकी है और 27 को उम्रकैद की सजा हो चुकी है।

Author Translated By अंकित ओझा भागलपुर | Updated: November 4, 2020 10:13 AM
koyli khutaha, nitish kumar, bihar chunavइस गांव में होता रहा है खूनी संघर्ष, अब विकास पर सब साथ।

भागलपुर से 10 किलोमीटर दूर स्थित गांव गोयली- खुटहा सैनिकों के गांव के रूप में जाने जाते हैं। यहां अधिकतर घर पक्के हैं। हर घर के सामने मोटरसाइकल या कार नजर आ जाएगी। इनपर बिहार पुलिस या फिर इंडियन आर्मी की प्लेट भी लगी होगी। यहां निजी विकास तो लोगों ने कर लिया है लेकिन घर से निकलते ही उफनती नालियां, स्वास्थ्य सेवा और स्कूल की कमी आज भी कायम है। इन दो गांवों में लगभग 10 हजार लोग रहते हैं लेकिन यहां एक भी एटीएम नहीं है।

भागलपुर का यह गांव अकसर चर्चा में रहता है। यहां बड़ी संख्या में लोग पुलिस या आर्मी में तो हैं ही साथ ही हिंसक झड़प और हत्या के मामले भी सामने आ चुके हैं। अप्रैल 1991 में बिजली के खंभों को लेकर यहां हिंसा हुई थी। साल 2019 में एक बार फिर ऐसी ही घटना हुई। अब तक इन गावों में 20 लोगों की हत्या हो चुकी है और 27 को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। 1991 की वह गर्मी जब अधिकारी गांव में बिजली का खंभा लगाने पहुंचे थे। यहां रेलवे लाइन के किनार एक खंभा कोयली की तरफ गिर गया। खुटहा की आबादी ज्यादा थी, वे लोग पहुंचे और इस खंभे को अपनी तरफ लेकर चले गए। दरअसल इन गांवों के बीच में एक नाला है जो आज भी बह रहा है।

बाद में अफवाह उड़ गई कि जिसके घर के पास खंभा पाया जाएगा उसको सजा हो जाएगी। खुटहा के कुछ लोगों ने कोयली के लोगों को पीट दिया और कहा कि वे पुलिस की मदद कर रहे थे। बाद में यही झ़ड़प गोलीबारी में बदल गई। पूरे दिन गोलियां चलती रहीं और शाम तक रंजीत यादव की हत्या हो गई। 14 साल जेल में गुजारकर आए एक शख्स ने बताया, ‘उस खूनी घटना की छाया आज भी गांव में मौजूद है।’ रंजीत के भाई पवन ने बताया, ‘यह लड़ाई एकदम महाभारत की तरह ही थी। एक ही परिवार के लोग दो तरफ से लड़ रहे थे।’

इस घटना के चार साल बाद खुटहा गांव के चार लोग मार दिए गए। इसके बाद 2005 तक यहां 16 और लोगों की हत्या हो गई। पिछले साल एक शख्स की फिर हत्या कर दी गई। हालांकि अब यहां के लोग दुश्मनी भुलाकर साथ आना चाहते हैं और अपने क्षेत्र के विकास के लिए हाथ मिलाना चाहते हैं। दोनों ही तरफ के लोग नौकरियों की कमी की बात करते हैं। वे रोजगार के मुद्दे पर तेजस्वी यादव के साथ दिखाई दिए।

कोयली गांव के स्कूल में चार कमरे हैं। एक में स्टोर है और एक ऑफिस है। यानी दो कमरों में ही बच्चों की पढ़ाई होती है। खुटहा के करमबीर ने कहा, ‘मैंने 2018 और 19 में दो बार बिहार पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षा पास की है। इसके अलावा सब इंस्पेक्टर का भी लिखित एग्जाम पास किया। अब तक इंटरव्यू नहीं हो पाए हैं।’ ये दोनों ही गांव अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र के अंतरगत आते हैं। कोयली नाथानगर और खुटहा कहलगांव में है। यहां के यादव वोट ज्यादातर आरजेडी के पक्ष में हैं। नाथानगर में पिछली बार जेडीयू उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।

यहां के विधायक लक्ष्मी कांत मंडल इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनकी टक्कर एलजेपी कैंडिडेट अमर सिंह कुशवाहा से है। आरजेडी ने यहां से अली अशरफ सिद्दीकी को उतारा है। कहलगांव में कांग्रेस के शुभानंद मुकेश चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं एनडीए की तरफ से बीजेपी के पवन कुमार मैदान में हैं। लोगों का कहना है कि इस लड़ाई झगड़े की वजह से दोनों गांवो में पिछले 30 साल में विकास नहीं हो सका। अफसोस है कि यह लड़ाई इतनी लंबी चलती रही। एक और ग्रामीण ने कहा, नीतीश ने बिजली तो दे दी लेकिन यह तो देनी ही थी। हमने सालों तक बिजली का इंतजार किया लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर चीज के लिए इंतजार ही करना होगा।

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