साल 2023 में जब कोटा में चंबल रिवर फ्रंट का उद्घाटन हुआ तो इसे बेहतर बनाने का मकसद था, इस 1200 करोड़ के प्रोजेक्ट में 26 घाट, सजे-धजे खंभे, लाल किला और ताजमहल के छोटे-छोटे मॉडल, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का 25 टन गनमेटल से बना चेहरा और शाम को टहलने के लिए एक शांत मार्ग शामिल था। लेकिन अब यहां आने वाले कम लोगों की संख्या और बढ़ते खर्च ने एक नई राजनीतिक बहस पैदा कर दी है क्या राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार का यह शोपीस प्रोजेक्ट जनता के पैसों की बर्बादी बनता जा रहा?

इस प्रोजेक्ट की देखरेख करने वाले कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) के अधिकारियों के मुताबिक, चंबल रिवर फ्रंट को 50 फीसदी नुकसान हो रहा है।

50 फीसदी का नुकसान

द इंडियन एक्सप्रेस से केडीए के एग्क्यूटिव इंजीनियर महेंद्र सक्सेना ने कहा, “रोजाना 1000 लोगों की आवाजाही के साथ सालाना रिवर फ्रंट पर 3.6 लाख लोग आते हैं। हम इससे करीब 1 करोड़ की कमाई करते हैं जबकि हमारा खर्च 2.1 करोड़ रुपये आता है। हम कोशिश कर रहे हैं कि और अधिक सैलानी आएं। ये पर्यटकों के लिए अच्छा अनुभव होगा, लेकिन हमें और अधिक पर्यटक चाहिए।”

एक अन्य अधिकारी ने कहा, “यहां गर्मी और सर्दियों की छुट्टियों में अधिक भीड़ दिखाई देती है।”

इस प्रोजेक्ट का 12 सितंबर 2023 को राजस्थान विधानसभा चुनाव से एक महीने पहले उद्घाटन किया गया और देश का पहला हेरिटेज रिवरफ्रंट बताया गया। इसे कोटा की कोचिंग हब वाली छवि से अलग दिखाने के लिए डिजाइन किया गया था। यह प्रोजेक्ट शुरू से ही विवादों से घिरा रहा, उद्घाटन के कुछ ही महीने बाद यह कानूनी जांच के दायरे में आ गया। अभी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने चल रही कार्यवाही में चंबल नदी के किनारे निर्माण से जुड़े कथित पर्यावरण नियमों के उल्लंघनों की जांच चल रही है, जिसमें मंजूरियों और इकोलॉजिकल प्रभाव को लेकर सवाल भी शामिल हैं।

बढ़ रही लागत

हालांकि लागत लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसे अगर उदाहरण से समझें तो अधिकारियों के मुताबिक, रोजाना शाम को की जाने वाली आरती पर प्रशासन को हर माह 12 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

राजस्व के अतिरिक्त स्रोत के तौर पर रिवरफ्रंट को शादियों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए भी किराए पर दिया जाता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। यहीं वर्ष 2023 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बेटी की शादी भी हुई थी, जो काफी चर्चित हुई थी।

भाजपा ने बताया सरकारी संसाधनों की बर्बादी

दक्षिण कोटा के भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने इस प्रोजेक्ट को सरकारी संसाधनों की बर्बादी बताया।

उन्होंने कहा, “अगर आप यह कहते हैं कि रिवरफ्रंट शहर की सुंदरता और नदी के लिए जरूरी था, तो घाटों को देखिए। यहां कोई हरियाली नहीं है, न ही पेड़े और न ही कहीं छाया की जगह। क्या कांग्रेस की सरकार को उम्मीद थी कि लोग यहां रात में आएंगे? क्यों यहां दिन, सूरज की गर्मी बर्दाश्त नहीं होती। अगर केडीए के पास इसकी देखरेख के लिए पैसे खत्म हो गए तो यह भूतिया टाउन बन जाएगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यहां सबसे अधिक प्रवेश शुल्क 200 रुपये प्रति व्यक्ति लिया जाता है, जिससे लोग कम आते हैं। विधायक ने कहा, “कोटा के लोग हर हफ्ते 200 रुपये प्रवेश शुल्क 200 रुपये नहीं दे सकते, केवल पर्यटक कर सकते हैं लेकिन कोटा तो कोचिंग संस्थानों के लिए जाना जाता है न कि पर्यटन के लिए।”

कांग्रेस विधायक ने लगाए भाजपा सरकार पर आरोप

हालांकि उत्तर कोटा के कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए वकालत की थी, इसका बचाव किया और सत्ताधारी भाजपा सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया। जबकि केडीए ने दावा किया कि उन्होंने दो बार इसे निजी कंपनी को सौंपने की कोशिश की लेकिन टेंडर फाइनल नहीं हो सके।

विधायक शांति धारीवाल ने दावा किया कि भाजपा सरकार को कोई आइडिया ही नहीं है कि इस प्रोजेक्ट को कैसे संभालें।

उन्होंने कहा,”इन्होंने (भाजपा सरकार) निजी कंपनी को काम देने के लिए 6 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला। कोई कंपनी रिवर फ्रंट के शुरुआती चरण का काम इतने अधिक पैसे में क्यों करेगी? उन्हें इसे पहले कम दर पर देना चाहिए फिर बाद में इसे बढ़ाना चाहिए।”

उन्होंने सैरगाह पर दुकानों की कमी के कारण पर्यटकों के आने की कमी बताई। शांति धारीवाल ने कहा, “रिवरफ्रंट के अंदर 100 दुकानें हैं लेकिन 10 से अधिक दुकाने संचालित नहीं हो रहीं। अगर कोई भी आदमी टहलने के लिए आता है तो उसे जलपान की जरूरत पड़ेगी। राज्य सरकार ने शहर में पर्यटन बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया और न ही वह इस परियोजना को संभाल सकी।”

पर्यटक ने भी बताया प्रवेश शुल्क अधिक

इसके बावजूद, रिवरफ्रंट पर कुछ लोग रोजाना आते रहते हैं। हिमाचल प्रदेश के रहने वाले मनीष सिंह, जो शहर में अपने परिवार से मिलने आए हैं, उनके लिए यह जगह सबसे अच्छी है, लेकिन वह भी इसे मानते हैं कि यहां प्रवेश शुल्क अधिक है।

उन्होंने कहा, शाम बिताने के लिए अच्छी जगह है। फाउंटेन लाइट शो, चंबल आरती, अलग-अलग सांस्कृतिक आयोजन, यह अच्छा अनुभव है, लेकिन 200 रुपये देना और अधिक आराम के लिए गोल्फ कोर्ट में 200 रुपये की सीट लेना, हर किसी का सामर्थ्य नहीं है।

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