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कोल्लम मंदिर हादसा: आग के गुबार के साथ मच गई चीख पुकार

घटनाक्रम के गवाह 63 साल के विजयन ने कहा कि कंक्रीट की इमारत में पटाखे और आतिशबाजी बनाने वाली सामग्री रखी थी जो विस्फोट में खाक हो गई।

Author कोल्लम | April 11, 2016 5:03 AM
सौ साल पुराने मंदिर में रविवार (10 अप्रैल) तड़के साढ़े तीन बजे के करीब धमाका हुआ, जब मंदिर परिसर में आतिशबाजी चल रही थी। (रॉयटर्स फोटो)

कोल्लम के सौ साल पुराने पुत्तिंगल देवी मंदिर में आग की भयावह घटना के दौरान तड़के 3.30 बजे एक बड़ा विस्फोट हुआ था और मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर तक झटके भी महसूस किए गए। गिरिजा नामक महिला ने कहा कि पहले कभी इस तरह का हादसा नहीं हुआ। गिरिजा का घर मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित है। उसने बताया कि उसने एक बड़े विस्फोट के बाद झटके महसूस किए। यह हादसा सात दिवसीय ‘मीना भरणी’ उत्सव के अंतिम दिन आतिशबाजी के दौरान हुआ। आधी रात के बाद से आतिशबाजी को देखने के लिए मंदिर के आसपास हजारों लोग जमा हुए थे। तभी करीब 3:30 बजे आग लग गई। आतिशबाजी की चिंगारी भंडार कक्ष में रखे पटाखों पर गिर गई और कानफोड़ू आवाज के साथ धमाका हुआ।

पास की एक इमारत की छत से आतिशबाजी देख रहे स्थानीय टीवी पत्रकार ने कहा कि जब आयोजन समाप्त होने वाला था, तभी हादसा हुआ। उन्होंने कहा, ‘मैंने बड़े आग के गुबार देखे और फिर जोरदार आवाज आई। इलाके की बिजली चली गई और मैंने लोगों की चीख-पुकार सुनी। बहुत दर्दनाक अनुभव था।’ इस पत्रकार ने कहा कि वह तत्काल मौके पर पहुंचे और 10 से 15 लोगों को मृत देखा। आग लगने के बाद मंदिर परिसर के आसपास क्षत-विक्षत शव और अंग पड़े देखे।

घटनाक्रम के गवाह 63 साल के विजयन ने कहा कि कंक्रीट की इमारत में पटाखे और आतिशबाजी बनाने वाली सामग्री रखी थी जो विस्फोट में खाक हो गई। घटनास्थल से कई मीटर दूर तक सीमेंट के स्लैब पड़े दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि मंदिर कार्यालय की इमारत भी पूरी तरह जल गई।

विजयन के मुताबिक शव इतनी बुरी तरह जल गए कि उनकी पहचान तक नहीं हो सकी। मंदिर परिसर में और आसपास मृतकों और घायलों के जूते-चप्पल बिखरे पड़े देखे गए। उन्होंने कहा, ‘घायलों और मृतकों को जल्द विभिन्न अस्पतालों में पहुंचाया गया। लेकिन चूंकि हादसा ऐसे समय में हुआ, अस्पताल ले जाने के लिए शुरू में वाहन खोजने में परेशानी हुई।’
उन्होंने कहा कि अधिकतर मारे गए लोग उनके ऊपर गिरे कंक्रीट के बड़े पत्थरों और लोहे के सरियों का शिकार हुए। ये सब आतिशबाजी देखने आए थे। घटना में घायल हुए एक शख्स ने बताया कि वह अपने दोस्त के साथ आयोजन में शामिल हुआ था। उसका दोस्त हादसे में मारा गया।

मंदिर अधिकारियों को आतिशबाजी प्रदर्शन करने की अनुमति देने के खिलाफ जिला कलेक्टर में शिकायत दाखिल करने वाली 73 साल की पंजाक्षियम्मा ने कहा कि विस्फोट में उनके घर को बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, ‘हमारा घर मंदिर के बहुत पास है। हर साल कोई न कोई नुकसान होता है। इसलिए हमने आतिशबाजी प्रदर्शन के खिलाफ शिकायत दाखिल की थी।’

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