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कोलकाता में कश्मीर जैसा सीन, पत्थरबाज बने वामपंथी, पुलिस को सड़क पर लिटा कर बेरहमी से पीटा

सीपीएम के ट्विटर हैंडल से किए ट्वीट में कहा गया था कि कोलकाता के सड़कों पर लाखों कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकार के लिए उतरे थे।

Author Updated: May 23, 2017 9:11 AM
सोमवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस कर्मी को लाठी मारता वामपंथ समर्थक। (PHOTO-PTI)

सोमवार को सेंट्रल कोलकाता में कश्मीर जैसा हाल दिखा। यहां भी पत्थरबाजी, आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज देखने को मिला। एक तरफ जहां लेफ्ट बंगाल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा था, वहीं पुलिस उन्हें तितर-बितर करने में जुटी थी। एक मौके पर पुलिस ने पत्रकारों को से भी मारपीट की। मायो और नई दिल्ली रोड के चौराहे पर कुछ वामपंथ समर्थकों ने एक पुलिस अफसर को लिटाकर उसे बांस के डंडे से बुरी तरह पीटा और उसके लात-घूंसे भी मारे। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस कर्मी की पहचान बोद्धिसत्व प्रमाणिक (40) के तौर पर हुई, जो बुर्राबाजार पुलिस थाने में सेकंड अॉफिसर हैं। उनकी दो अंगुलियों में फ्रैक्चर है और नाक और माथे पर सूजन आई है। प्रदर्शनकारियों से मुठभेड़ के दौरान उसके हेलमेट का सनसाइड टूट गया और उसकी शर्ट पर लगा नेमटैग भी फट गया प्रमाणिक प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के दौरान अपने दल से अलग हो गए थे, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेरकर मारपीट की।

वहीं आर प्लस न्यूज चैनल के फोटोजर्नलिस्ट इंद्रनील भदूरी मायो रोड पर एक लाइव प्रोग्राम कर रहे थे, जिसके बाद उनपर भी पुलिस वालों ने लाठीचार्ज किया और मुंह पर मुक्के मारे। भदूरी ने कहा कि मैं लाइव प्रोग्राम कर रहा था और पुलिसवालों ने मुझपपर घूंसे बजा दिए। मेरा चश्मा भी टूट गया। इससे पहले मैं कुछ कर पाता, पुलिसवाले मेरे उल्टे हाथ और दोनों पैरों पर लाठियां मारे लगे। उन्होंने मेरा वीडियो कैमरा भी तोड़ दिया।

सोमवार को सीपीएम समेत अन्य वामपंथियों पार्टियों ने तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सरकार की कथित किसान विरोधी नीतियों का विरोध किया था। पुलिस ने प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए लाठी चार्ज की और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस ने सीपीएम विधायकों सुजान चक्रवर्ती, अशोक भट्टाचार्य और तन्मय भट्टाचार्य को हिरासत में ले लिया था और सेंट्रल कोलकाता में करीब दो हजार पुलिस वाले तैनात किए गए थे। वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वामपंथी दलों ने राज्य के सचिवालय नबान्ना भवन के बाहर चार लाख कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा था। सीपीएम के ट्विटर हैंडल से किए ट्वीट में कहा गया था कि कोलकाता के सड़कों पर लाखों कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकार के लिए उतरे थे।

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