ताज़ा खबर
 

कोलकाता में 1930 से चल रही मीट की दुकान को करना पड़ा बंद, जानें हैरान करने वाला कारण

कोलकाता के मिर्ज़ा गालिब स्ट्रीट में करीब 80 सालों से मीट की एक आइकॉनिक दुकान चल रही थी। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि दुकान को बंद करना पड़ा।

Author January 14, 2019 7:12 PM
प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

कोलकाता के मिर्ज़ा गालिब स्ट्रीट में करीब 80 सालों से मीट की एक आइकॉनिक दुकान चल रही थी। इस दुकान की खासियत यह थी कि यहां एक ही छत के नीचे चिकन, पोर्क और बीफ बिका करती थी, लेकिन किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई। लेकिन, अब यह दुकान टूट चुकी है और इसकी जगह गार्मेंट की दुकान सजने लगी है। अब ऐसे में सवाल यहां ये उठता है कि आखिर यह दुकान क्यों बंद करनी पड़ी? इस सवाल का जवाब आपको भी हैरान कर देगा।

हिंदू और मुस्लिम कर्मचारियों का बदला व्यवहार: बता दें कि दुकान इसलिए बंद कर देनी पड़ी, क्योंकि वहां काम करनेवाले हिन्दू और मुस्लिम कर्मचारियों का व्यवहार बदल गया था, जिस कारण दुकान सुचारू रूप से चलाना नामुमकिन होता जा रहा था। द हिन्दू में छपी खबर के मुताबिक, हिन्दू कर्मचारी बीफ छूने से और मुस्लिम कर्मचारी पोर्क को छूने से कतराने लगे थे जिस कारण व्यवसाय प्रभावित होने लगा था। उक्त दुकान के मैनेजर जॉय धर का कहना है, ‘एक असामान्य समस्या दरपेश हो गई थी। हिन्दू कर्मचारियों ने बीफ छूना बंद कर दिया था और मुस्लिम कर्मचारियों ने पोर्क छूना। इस दुकान में ऐसी दिक्कत पहले कभी भी नहीं आई थी।’

बढ़ गई परेशानी: साल 2018 अक्टूबर में स्थिति तब और खराब हो गयी थी, जब जॉय घोष बीमार पड़ गये थे। बताया जाता है कि पुराने कर्मचारी जो कच्चे मीट की प्रॉसेसिंग कर रहे थे रिटायर कर रहे थे और नये कर्मचारी मीट को छूना नहीं चाहते थे। चूंकि, दुकान की मालकिन आगमनी धर दुकान को अकेले हैंडल कर पाने में असर्थन थीं, इसलिए मीट का कारोबार ही बंद कर देने का फैसला लिया गया।

सुभाष चंद्र बोस के मेयर रहते मिला था लाइसेंस: इस मीट दुकान को लाइसेंस 30 के दशक में दिया गया था। उस समय सुभाष चंद्र बोस कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के मेयर थे। दुकान के लिए लाइसेंस कलमान गोहरी नाम के शख्स ने लिया था, जो मूलतः हंगरी के नागरिक हैं। उन्होंने लंबे समय तक यह दुकान चलायी और बाद में एक बंगाली परिवार इसे खरीद लिया। दुकान खरीदने के बाद भी दुकान में मीट ही बिका करता था।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App