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बर्खास्‍त आईपीएस ने पीएम नरेंद्र मोदी पर कसा तंज- इस्‍तीफा देकर माफी मांगना कैसा रहेगा?

भट्ट, साल 2002 में गुजरात में हुए दंगों के दौरान वह तब के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी की भूमिका पर भी प्रश्न खड़े कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि तत्कालीन सीएम ने पुलिस को हिंदुओं के प्रति नरम रवैया अपनाने का आदेश दिया था।

भट्ट, गुजरात कैडर में 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। (तस्वीरें संजीव भट्ट व नरेंद्र मोदी के FB पेज से ली गई हैं)

बर्खास्त चल रहे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी संजीव भट्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बिना उनका नाम लिए तंज कसा है। बुधवार (एक अगस्त) को उन्होंने सोशल मीडिया पर पूछा कि 15 अगस्त के भाषण के लिए आपके (पीएम के) क्या विचार और ख्याल हैं? इस्तीफे के बाद देश से माफी मांगना कैसा रहेगा? भट्ट, गुजरात कैडर में 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। साल 2011 से वह निलंबित चल रहे थे। कारण- साल 2015 में उनका बगैर अनुमति के लंबी छुट्टी पर चले जाना था, जिसके बाद कार्रवाई के रूप में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था।

यही नहीं, साल 2002 में गुजरात में हुए दंगों के दौरान वह तब के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी की भूमिका पर भी प्रश्न खड़े कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि तत्कालीन सीएम ने पुलिस को हिंदुओं के प्रति नरम रवैया अपनाने का आदेश दिया था। भट्ट का दावा था कि मोदी ने जब यह बात कही थी, तब वह खुद उस दौरान वहां उपस्थित थे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दंगों की जांच के लिए बनी स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से मोदी को क्लीन चिट मिल गई थी। कोर्ट ने बाद में भट्ट की वह अर्जी भी ठुकरा दी थी, जिसमें उन्होंने इस मामले में जांच के लिए एसआईटी के लिए गठन की मांग उठाई थी।

वहीं, कुछ समय पहले आईपीएस अधिकारी का कथित सेक्स वीडियो भी लीक हुआ था, जिसके बाद गुजरात की सरकार ने भट्ट को कारण बताओ नोटिस भेजा था। जवाब में अधिकारी ने खुद पर लगे सभी आरोपों को गलत ठहराया था, जबकि सोमवार (एक अगस्त) को अहमदाबाद नगर पालिका ने उनके बंगले के अवैध निर्माण को ढहाने का काम शुरू किया।

दावा है कि भट्ट के आवास पर गैरकानूनी ढंग से दो मंजिला हिस्से का निर्माण किया गया था। यहां के सुशीलनगर स्थित बंगले के हिस्से में कराए गए निर्माण के खिलाफ उनके पड़ोसी प्रवीण पटेल ने साल 2011 में हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी। मगर तब कोई खास कार्रवाई नहीं हो सकी थी।

अगले साल यानी कि 2012 में नगर पालिका तीन दिनों के भीतर इस निर्माण को ढहाने की अधिसूचना जारी करने के बाद भी उस पर कोई कदम नहीं उठा पाई थी। मगर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के स्थाई रोक से मना करने पर सोमवार को नगर पालिका का दस्ता वहां पहुंचा, जिसने कार्रवाई शुरू की।

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