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Kumbh 2019: कल से दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले का आगाज, 49 दिन में आएंगे 12 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु

समुद्र मंथन में निकले कलश से छलकीं अमृत की चंद बूंदों से हजारों साल पहले शुरू हुए कुंभ मेले का आगाज कल (15 जनवरी 2019) से प्रयागराज में हो रहा है।

प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- द फाइनेंशियल एक्सप्रेस

प्रयागराज से कुमार सम्भव जैन : समुद्र मंथन में निकले कलश से छलकीं अमृत की चंद बूंदों से हजारों साल पहले शुरू हुए कुंभ मेले का आगाज कल (15 जनवरी 2019) से प्रयागराज में हो रहा है। दुनिया भर के धार्मिक आयोजनों में सबसे बड़ा यह मेला 49 दिन (4 मार्च) तक जारी रहेगा। इस बार कुंभ में 12 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आ सकते हैं। बता दें कि इस बार मेले में 72 देशों के नुमाइंदे भी आ रहे हैं, जिनकी आगवानी खुद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

यूनेस्को ने बढ़ा दी खासियत : करीब 9 महीने पहले यूनेस्को ने कुंभ मेले को सांस्कृतिक विरासत में शामिल किया। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से मदद लेकर इस मेले को खास बनाने की तैयारी कर ली। वहीं, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने देश के हर कोने की झलक मेले में दिखाई है।

25 किमी ज्यादा बड़े इलाके में लगा मेला : बता दें कि इस बार कुंभ मेला 45 किलोमीटर दायरे में लगा है, जबकि हर बार यह सिर्फ 20 किलोमीटर के दायरे में होता था। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरे प्रयागराज शहर में 15 फ्लाईओवर और अंडरब्रिज व 38 पैंटून पुल बनाए गए। वहीं, 264 सड़कों का चौड़ीकरण कराया गया। इनके अलावा सिर्फ मेला परिसर में 1.22 लाख बायो टॉयलेट का निर्माण कराया गया। पार्किंग के लिए 1300 हेक्टेयर इलाके में 94 पार्किंग स्लॉट तैयार किए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए शटल बस और ई-रिक्शा की संख्या में भी इजाफा किया गया है। आयोजकों के मुताबिक, मेला क्षेत्र में रोजाना 500 सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पहली बार 20 लाख वर्ग फीट में दीवारें पेंट की गई हैं।

20 सेक्टर में बांटी गई कुंभ नगरी : मेला अधिकारी विजय किरण आनंद के मुताबिक, पूरी कुंभ नगरी को 20 सेक्टरों में बांटा गया है। इनमें कल्पवासियों के लिए 5 हजार कैंप बनाए गए हैं। आनंद ने अनुमान जताया कि इस बार मेले में 12 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आ सकते हैं। फिलहाल कुंभ नगरी के ज्यादातर इलाके जूना अखाड़ा और निर्मोही अखाड़ा को सौंप दिए गए हैं।

सेक्टर-18 पर खास फोकस : जानकारी के मुताबिक, कुंभ नगरी में सबसे ज्यादा फोकस सेक्टर-18 पर रखा गया है। यहां वीआईपी गेट भी बनाया गया है। इस पॉइंट पर 72 देशों के ध्वज लगे हुए हैं, जिनके नुमाइंदे भी मेले में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद उनकी आगवानी करने की तैयारी कर रखी है।

कुंभ नगरी में शहर के बराबर थाने : सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के मकसद से कुंभ नगरी के हर सेक्टर में पुलिस थाने बनाए गए हैं। साथ ही, फायर ब्रिगेड की टीमें भी तैनात की गई हैं। जानकारी के मुताबिक, कुंभ नगरी में कुल 40 अस्थायी थाने बने हैं। वहीं, पूरे प्रयागराज शहर में 42 थाने हैं। इसके अलावा कुंभ नगरी में 20 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिन्हें भगदड़ जैसी स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग भी दी गई है।

अब मेले में खोना नहीं होगा ‘आसान’ : कुंभ मेले में भारी भीड़ के बीच किसी के खोने जैसी बातें आम हैं, लेकिन इसके लिए भी खास तैयारी की गई है। इस बार श्रद्धालुओं की मदद के लिए 15 लॉस्ट एंड फाउंड सेंटर बनाए गए हैं। साथ ही, इसके लिए मोबाइल ऐप भी बनाया गया है, जिससे किसी को खोजने में आसानी होगी।

7000 करोड़ रुपए हुए खर्च : 2019 कुंभ मेले के आयोजन के लिए प्रदेश सरकार ने 7000 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 2800 करोड़ रुपए सिर्फ मेले के आयोजन के लिए जारी किए गए हैं। वहीं, 4300 करोड़ रुपए से शहर और मेलास्थल का विकास किया गया। इनके अलावा 247 करोड़ रुपए कंट्रोल एंड कमांड सेंटर बनाने में खर्च हुए।

2013 में था सिर्फ इतना इंतजाम : बता दें कि 2013 कुंभ मेले के लिए 1214 करोड़ रुपए ही आवंटित किए गए थे। उस दौरान प्रयागराज (तब इलाहाबाद) शहर में 160 किमी लंबी सड़कों का निर्माण कराया गया। वहीं, 17 पुल, 14 अस्पताल और 35 हजार शौचालयों का निर्माण कराया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, 2013 के कुंभ मेले के दौरान शहर में करीब 70 लाख श्रद्धालु आए थे।

कुंभ का पौराणिक महत्व : ज्योतिषियों की मानें तो जब बृहस्पति कुंभ राशि और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तब कुंभ मेले का आयोजन होता है। त्रिवेणी के संगम के कारण प्रयाग का कुंभ मेला सभी मेलों में सबसे ज्यादा महत्व रखता है। कहा जाता है कि देवताओं और राक्षसों को समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश मिला, जिसे हासिल करने के लिए उनमें संघर्ष हुआ। असुरों से अमृत बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वह अमृत कलश अपने वाहन गरुड़ को दे दिया। असुरों ने गरुड़ से वह पात्र छीनने का प्रयास किया तो अमृत की कुछ बूंदें प्रयागराज, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिर गईं। कहा जाता है कि तब से हर 12 साल बाद इन स्थानों पर कुंभा मेला आयोजित किया जाता है।

कुंभ मेले के ऐतिहासिक मायने : कुंभ मेला कब से शुरू हुआ, इस संबंध में कुछ भी लिखित प्रमाण नहीं है। हालांकि, इस मेले का सबसे पहला लिखित प्रमाण बौद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग के लेख में मिलता है। उन्होंने छठवीं शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में होने वाले कुंभ मेले का वर्णन किया है। वहीं, ईसा से 400 वर्ष पूर्व सम्राट चंद्रगुप्त के दरबार में आए एक यूनानी दूत ने भी ऐसे ही मेले का जिक्र अपने लेख में किया है।

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