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भोपाल सीट से दिग्विजय सिंह को टक्कर देंगी साध्वी प्रज्ञा, जानें कैसे शुरू हुआ राजनीति का सफर

मालेगांव बम धमाकों में नाम आने के बाद चर्चा में रही साध्वी प्रज्ञा एक बार फिर खबरों में हैं। जानें कौन हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर।

Author Updated: April 19, 2019 2:31 PM
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, फोटो सोर्स- जनसत्ता. कॉम

मालेगांव बम धमाकों में नाम आने के बाद चर्चा में रही साध्वी प्रज्ञा एक बार फिर खबरों में हैं। इस बार वजह राजनीति है। दरअसल साध्वी प्रज्ञा ने बुधवार (17 अप्रैल) को बीजेपी ज्वॉइन की। इसके कुछ देन बाद ही पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठित भोपाल संसदीय सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया। ब्वॉय कट बाल, गले में रुद्राक्ष की माला और भगवा कपड़े 48 वर्षीय साध्वी की पहचान बन चुके हैं।

मालेगांव बम धमाके मामले में आरोपी: साध्वी प्रज्ञा दक्षिणपंथी अतिवाद का चेहरा बनकर उस समय उभरीं, जब महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने 2008 में उन्हें मालेगांव बम धमाके मामले में हथकड़ियां पहना दी थीं। 9 साल जेल में रहने के बाद इस बहुचर्चित मामले में वह इन दिनों जमानत पर हैं।

प्रज्ञा के पिता चंद्रपाल सिंह आयुर्वेदिक चिकित्सक थे: प्रज्ञा के पिता चंद्रपाल सिंह आयुर्वेदिक चिकित्सक थे, जो आरएसएस से जुड़े थे। ऐसे में प्रज्ञा का नाता भी संघ से जुड़ गया। उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों से ही बीजेपी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विश्व हिंदू परिषद की महिला शाखा दुर्गा वाहिनी में भी काम किया। बता दें कि मध्य प्रदेश के भिंड जिले से ताल्लुक रखने वाली प्रज्ञा ठाकुर इतिहास में एमए हैं।

भाषण देने की कला के लोग बहुत कायल थे: साध्वी के भाषण देने की कला के लोग बहुत कायल थे। अपनी इस खूबी के कारण ही वह कैंपस में काफी लोकप्रिय हो गईं। बताया जाता है कि शुरू में भोपाल, देवास और जबलपुर में उनके भाषणों का काफी प्रभाव देखने को मिला। इसके बाद प्रज्ञा अचानक एबीवीपी छोड़कर साध्वी बन गईं। इसके बाद वह प्रवचन देने लगीं। उन्होंने सूरत को अपनी कार्यस्थली बना लिया। वहीं, सूरत में अपना आश्रम भी बनवा लिया। बता दें कि चुनावी मौसम में बीजेपी साध्वी प्रज्ञा को अपना स्टार प्रचारक भी बना चुकी है।

 

जेल में हो गया था ब्रेस्ट कैंसरः 29 सितम्बर 2008 को मालेगांव में हुए बम ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 101 जख्मी हुए थे। इसके बाद साध्वी को गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में ही साध्वी के ब्रेस्ट कैंसर हो गया, जिसका इलाज 2016-17 में चला। 27 दिसम्बर, 2017 में एनआईए अदालत ने उनके खिलाफ सख्त मकोका कानून (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) के तहत लगे आरोपों को हटा दिया। इस धमाके के मामले में साध्वी के अलावा कर्नल प्रसाद पुरोहित, समीर कुलकर्णी और अन्य आरोपियों को भी राहत दे दी गई। एनआईए उन्हें इस मामले में क्लीनचिट भी दे चुकी है।

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