आजाद ने दिया जवाब, जेटली पर साधा निशाना - Jansatta
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आजाद ने दिया जवाब, जेटली पर साधा निशाना

कीर्ति आजाद ने फिर से वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा और पार्टी से कहा कि जेटली पार्टी अनुशासन की आड़ नहीं ले सकते क्योंकि डीडीसीए के मामले का भाजपा से कोई संबंध नहीं है..

Author नई दिल्ली | January 2, 2016 12:57 AM
भाजपा से निलंबित सांसद कीर्ति आजाद।

भाजपा से निकाले जाने के अंदेशे से बेफिक्र निलंबित सांसद कीर्ति आजाद ने शुक्रवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली पर फिर से निशाना साधा। उन्होंने अपनी पार्टी से कहा कि जेटली पार्टी अनुशासन की आड़ नहीं ले सकते क्योंकि डीडीसीए के मामले का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। भाजपा की ओर से गुरुवार को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उसमें लगाए गए सभी आरोपों का बिंदुवार जवाब देते हुए आजाद ने कहा कि दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में भ्रष्टाचार का मुद्दा वे बीते नौ वर्षों से उठाते आ रहे हैं और भाजपा ने उनसे एक बार भी नहीं कहा कि वे इसे नहीं उठाएं।

खुद को निलंबित किए जाने की पार्टी की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए आजाद ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे में जेटली या पार्टी के किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। वैसे भी जेटली को डीडीसीए का प्रमुख पार्टी ने नहीं बनाया था। उन्होंने पूर्व के भाजपा अध्यक्षों का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए कहा कि सभी तीन सम्मानित पार्टी अध्यक्षों ने भी माना था कि क्रिकेट का हमारी पार्टी की गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है और डीडीसीए में जेटली की भूमिका उनका खुद का मामला है।

बिहार के दरभंगा से सांसद ने कहा- जेटली के अलावा पार्टी के किसी दूसरे पदाधिकारी के पास मेरी या क्रिकेटरों (बिशन सिंह बेदी व अन्य) की ओर से डीडीसीए में गड़बड़ियों की शिकायत किए जाने से दुखी होने का कारण नहीं है। कीर्ति आजाद ने कहा- मैं नहीं समझ पाता कि पार्टी से जिनका कोई संबंध नहीं है वैसी गतिविधियों में खुद को शामिल करने वाला व्यक्ति पार्टी की आड़ का दावा कैसे कर सकता है, जबकि संस्था में गड़बड़ियों की बात उठी है और साबित हो चुकी है।

आजाद के अनुसार उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और संगठन महासचिव राम लाल को बीते 18 दिसंबर को यह बताया था कि जेटली को भाजपा ने डीडीसीए का अध्यक्ष नहीं बनाया था। 18 दिसंबर को पार्टी अलाकमान ने आजाद को तलब किया था। उन्होंने कहा कि अगर वे डीडीसीए के अध्यक्ष होते तो संगठन को चलाने से जुड़े सभी जोखिम उनसे संबंधित होते और जब वे किसी कुप्रबंधन, जालसाजी और अनियमितता में संलिप्त पाए जाते तो पार्टी की आड़ नहीं लेते।

आजाद ने शाह से कहा था कि वे जेटली के साथ साझा बैठक में डीडीसीए में भ्रष्टाचार के संदर्भ में सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के इच्छुक हैं, लेकिन न तो शाह और न ही राम लाल ने दोबारा उनसे संपर्क किया। दोबारा संपर्क नहीं किया गया ऐसे में मैंने मान लिया कि क्रिकेट से जुड़े मामले का पार्टी की गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। जब मैं पार्टी में किसी का नाम नहीं लेता तो पार्टी के अनुशासन के दायरे में रहूंगा। मैंने जेटली या पार्टी के किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। जेटली पर हमला जारी रखते हुए आजाद ने कहा कि उन्होंने पार्टी या इसके पदाधिकारी को कभी बदनाम नहीं किया, जैसा कि कारण बताओ नोटिस में कहा गया था।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे 22 साल से पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं और अपनी सफलता और पहचान का श्रेय भाजपा को देते हैं। आजाद ने दावा किया कि शाह और रामलाल के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार का सबूत दिखाया था। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप से इनकार करते हुए सांसद ने कहा- मैंने पार्टी के मंच से बाहर कभी आरोप नहीं लगाया कि हमारी पार्टी के लोग भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल हैं। जेटली का यह तर्क असत्य और निराधार है कि मैंने उनको विशेष रूप से निशाना बनाया है।

डीडीसीए मामलों पर पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए आजाद ने कहा कि मैंने जेटली या पार्टी के किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। कारण बताओ नोटिस में यह भी कहा गया था कि कांग्रेस सदस्यों की ओर से प्रोत्साहित किए जाने के बाद वे लोकसभा में इस मुद्दे पर बोले। इस आरोप से इनकार करते हुए आजाद ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के कहने के बाद वे बोले और सिर्फ समयबद्ध सीबीआइ जांच की मांग की थी।

भाजपा ने उन पर यह भी आरोप लगाया था कि वे दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी और इसके पदाधिकारियों के खिलाफ बोले थे। नोटिस में कहा गया कि आजाद ने आस्तीन का सांप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस आरोप को भी खारिज करते हुए निलंबित सांसद ने कहा कि इस दलील के समर्थन में मीडिया की कोई प्रति दिखाइए कि मैंने पार्टी को बदनाम किया। बिहार चुनाव के बाद मैंने कोई मुद्दा नहीं उठाया और एक साक्षात्कार में मैंने अपने संसदीय क्षेत्र में पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली थी।

आजाद ने लिखा है- मैंने कहा था कि हार के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि सभी स्थानीय नेता केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों के बारे में बताने में नाकाम रहे। पार्टी को आजाद ने याद दिलाया है कि 1993 में पार्टी के साथ वे उस वक्त जुड़े थे जब पार्टी बुरे दौर से गुजर रही थी। तब से वे एक वफादार सैनिक के रूप में काम कर रहे हैं।

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