ग्लोबल शिपिंग ग्रुप मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (MSC) की ओर से अडानी विझिंजम पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के बारे में केरल सरकार से सलाह नहीं ली थी। केरल की कांग्रेस सरकार ने यह बात बुधवार को कही है। अडानी विझिंजम पोर्टेस प्राइवेट लिमिटेड सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 40 सालों के लिए विझिंजम अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के निर्माण, वित्तपोषण और संचालन के लिए जिम्मेदार है।

मंगलवार को अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने घोषणा की कि एमएससी की टर्मिनल ब्रांच टर्मिनल इन्वेंस्टमेंट लिमिटेड (टीआईएल) ने एवीपीपीएल में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है, जिसकी कीमत 13,000 करोड़ रुपये हैं। इसे भारतीय बंदरगाह ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निजी निवेश बताया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने सदन को दी गई जानकारी

मुख्यमंत्री वी.डी.सतीशन ने बुधवार को विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार को इस डील की जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा, “अडानी ग्रुप का राज्य सरकार से कोई संपर्क नहीं था। रियायत समझौते के मुताबिक, रियायतग्राही को राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना पोर्ट के स्वामित्व में कोई परिवर्तन नहीं करना चाहिए। 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का अर्थ है स्वामित्व में बदलाव, जो राज्य सरकार के सहमति के बिना मुमकिन नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएससी सिर्फ एक निवेशक नहीं है और राज्य सरकार इस बात की जांच करेगी कि यह निवेश पोर्ट के संचालन को कैसे प्रभावित करेगा।

उन्होंने कहा, “चूंकि पोर्ट एक अहम बुनियादी ढांचा है, ऐसे में नेशनल सिक्योरिटी चिंता का विषय है। राज्य के हितों की रक्षा और जनहित को सुनिश्चित करने के बाद ही इस सौदे को मंजूरी दी जाएगी। निष्पक्ष कंपटीशन के लिए स्पेस होनी चाहिए और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस डील से पोर्ट में किसी विशेष कंपनी का एकाधिकारी न हो जाए। एक ऐसी सुविधा होनी चाहिए, जहां सभी हितधारक बिना किसी भेदभाव के व्यापार कर सकें।”

पूर्व सीएम ने भी जताई चिंता

विधानसभा नेता प्रतिपक्ष और सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो सदस्य पिनाराई विजयन ने भी ऐसे ही बयान जारी किए। साथ ही यह भी कहा कि अडानी पोर्ट में अपनी हिस्सेदारी केवल राज्य सरकार की सहमति से ही बेच सकता है।

पिनाराई विजयन ने कहा, “49 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की खबर बेहद चिंताजनक है। जब शिपिंग कंपनी एमएससी और अडानी ग्रुप हाथ मिलाते हैं तो एकाधिकारी का खतरा बन जाता है। यह राज्य के व्यावसायिक हितों और पोर्ट के विकास के खिलाफ होगा। जब एक विशेष कंपनी को पोर्ट पर एकाधिकार मिल जाता है और बंदरगाह के विकास के खिलाफ होगा। जब एक विशेष कंपनी को पोर्ट पर एकाधिकार मिल जाता है तो अन्य सभी को उसकी शर्तें माननी पड़ेगी। इससे वित्तीय अनियमितताएं पैदा होंगी और पोर्ट के बहु संचालक उद्यम के रूप में विकसित होने की स्थिति खत्म हो जाएगी।”

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अडानी ग्रुप ने भारत के न्यूक्लियर पावर सेक्टर में बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर ली है। समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने घोषणा की है कि कंपनी 2035 तक 10 गीगावाट (GW) न्यूक्लियर पावर जेनरेशन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें