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गजब: मजदूर दिवस पर कंडक्टर बन गए एमडी, हाथ में थैला लटका पैसेंजर्स के काटे टिकट

परिवहन प्रबंध निदेशक ने कंडक्टर की वर्दी पहन रखी थी। उन्होंने कहा कि मेरे निगम के अहम कामों की जिम्मेदारी चालक और कंडक्टर निभाते हैं, जिनकी संख्या 32,000 है, इसलिए मैंने सोचा कि मैं कंडक्टर बन जाऊं।

Author May 1, 2018 6:43 PM
केरल स्टेट कॉरपोरेशन के एमडी कंडक्टर बनकर बस में टिकट काटने लगे।

1 मई को मजदूर दिवस के रुप में मनाया जाता है। इस बेहद खास मौके पर त्रिवेन्द्रम से एक बेहद ही खास तस्वीर सामने आई है। मजदूर दिवस पर यहां ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के एमडी कंडक्टर बन कर यात्रियों के बीच पहुंच गए। हाथों में थैला लेकर वो बस में यात्रियों का टिकट काटने लगे। इस दौरान उन्होंने टिकट चेकिंग भी की। केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर टीजे थाचनकारी को बस कंडक्टर बनकर बस के अंदर टिकट काटते देख बस में बैठे यात्री हैरान हो गए। लेकिन गले में थैला लटकाए थाचनकारी बड़े ही आराम से लोगों का टिकट काट रहे थे।

मजदूर दिवस के दिन बस कंडक्टर के तौर पर काम कर रहे थानचकारी ने कहा कि जब तक मैं यह नहीं जानूंगा कि मेरे कर्मचारी काम कैसे करते हैं मैं कैसे उनका नेतृत्व कर सकता हूं?। कंडक्टर बनकर काम करने से मुझे लोगों से घुलने-मिलने का मौका भी मिला। थाचनकारी ने आगे कहा कि इससे ट्रांसपोर्ट सर्विस को और ज्यादा बेहतर बनाने में हमें मदद मिलेगी और यात्री सुविधाएं भी बढ़ेंगी। ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के एमडी को कंडक्टर के रुप में अपने बीच पाकर यात्री भी काफी खुश नजर आए। इस दौरान यात्रियों ने अपनी समस्याएं भी थाचनकारी से शेयर कीं।

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बस में परिवहन प्रबंध निदेशक ने कंडक्टर की वर्दी पहन रखी थी। उन्होंने कहा कि मेरे निगम के अहम कामों की जिम्मेदारी चालक और कंडक्टर निभाते हैं, जिनकी संख्या 32,000 है, इसलिए मैंने सोचा कि मैं कंडक्टर बन जाऊं। उन्होंने यह भी बतलाया कि उन्होंने बस चालक के लाइसेंस के लिए भी आवेदन किया है और जल्द ही वो चालक भी बनेंगे।

आपको याद दिला दें कि 1 मई 1886 को मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी। जबकि भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 को चेन्नई में की थी। हालांकि उस समय इसे मद्रास दिवस के रुप में मनाया जाता था। इसी दिन मजदूरों के काम करने के समय को लेकर बड़ा फैसला लिया गया था। फैसले के तहत दुनिया के मजदूरों के अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटे में तब्दील कर दिया गया था। दुनिया के करीब 75 से ज्यादा देशों में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है। दुनिया की कई बड़ी-छोटी कंपनियों में आज के दिन छुट्टी होती है।

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