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सबरीमला श्रद्धालुओं की गाड़ी हादसे का शिकार हुई तो मुस्लिमों ने खोल दिए मस्जिद के दरवाजे

हादसे के एक चश्मदीद शाहुल हमीद फैजी ने मीडिया को बताया, ''जिस वाहन से श्रद्धालु सफर कर रहे थे वह पूरी तरह से नष्ट हो गया था, हम उन तीर्थयात्रियों को मस्जिद ले आए जिन्हें छोटी चोटें आई थीं और उन्हें नाश्ता और जलपान कराया।''

प्रतीकात्मक फोटो PC: इंडियन एक्सप्रेस

बीते गुरुवार को केरल के सबरीमाला मंदिर में पहली बार दो महिलाओं के प्रवेश करने के बाद मंदिर प्रशासन और दक्षिणपंथी संगठनों में खास रोष देखा जा रहा है और इसे लेकर हिंसक प्रर्दशन भी किए जा रहे हैं लेकिन इसी बीच पलक्कड़ जिले में कुछ मुसलमानों ने सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल पेश की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 15 सबरीमाला श्रद्धालुओं से भरा एक वाहन हैदराबाद से चला था जो कुझलमंड के पास हादसे का शिकार हो गया। हादसा जिस वक्त हुआ, उस समय कुछ लोग पास की मस्जिद में सुबह की नवाज पढ़ने जा रहे थे। उन्होंने हादसे को देखा तो वे फौरन उस तरफ दौड़े जहां धान के खेत में वाहन जा गिरा था। हादसे के शिकार लोगों के लिए मुस्लिमों ने मस्जिद के दरवाजे खोल दिए। वे उन्हें वहां ले आए और उनका खातिरदारी की। हादसे के एक चश्मदीद शाहुल हमीद फैजी ने मीडिया को बताया, ”जिस वाहन से श्रद्धालु सफर कर रहे थे वह पूरी तरह से नष्ट हो गया था, हम उन तीर्थयात्रियों को मस्जिद ले आए जिन्हें छोटी चोटें आई थीं और उन्हें नाश्ता और जलपान कराया।”

बाद में पुलिस ने जब दूसरे वाहन का इंतजाम किया तब श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा फिर से शुरू की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसी दिन से केरल में हिंसक प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। इसके एक दिन पहले पहाड़ी स्थित भगवान अयप्पा के मंदिर में 44 वर्षीय कनकदुर्गा और 42 वर्षीय बिंदू ने प्रवेश किया था। इसके विरोध में सबरीमाला कर्म समिति ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से सुबह से लेकर शाम तक के बंद का आह्मवान किया था। उस दिन राज्य के विभिन्न हिस्सों से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सूचनाएं आई थीं।

बता दें कि पिछले वर्ष 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में हर आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी लेकिन मंदिर प्रशासन और दक्षिणपंथी संगठन शीर्ष अदालत के इस फैसले को मानने को तैयार नहीं हैं। लोग मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं केरल की पिनराई विजयन सरकार हर हाल में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला लागू कराने का आश्वासन दे रही है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि गुरवार से लेकर अब तक करीब 10 महिलाएं मंदिर में दर्शन कर चुकी हैं। बीजेपी पर आरोप लग रहा है कि वह सबरीमाला के जरिये अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रही हैं।

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