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धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और समाजवादी मूल्यों के चलते केरल को बनाया जा रहा है निशाना: विजयन

नोटबंदी का केरल से ज्यादा विरोध हुआ तो यहां की सहकारी समितियों को जिसमें मेहनतकश केरलवासियों का पैसा लगा है को कालेधन का अड्डा घोषित कर दिया गया।

Author नई दिल्ली | October 16, 2017 4:15 AM
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन। (पीटीआई फाइल फोटो)

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रविवार को कहा, ‘आज सोशल मीडिया से लेकर अन्य जगहों पर केरल को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि यह वह राज्य है जिसने धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और समाजवादी मूल्यों पर विश्वास किया। यह वह राज्य है जिसने नोटबंदी जैसे कदम का सबसे पहले विरोध किया।’ विजयन रविवार को दिल्ली यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट और नेशनल अलायंस आॅफ जर्नलिस्ट की साझा गोष्ठी में बोल रहे थे। विजयन ने कहा कि विकास का ‘केरल मॉडल’ गुणवत्तापूर्ण जिंदगी की राह दिखाता है। ‘खतरे में लोकतंत्र : अनैतिक खबरनवीसी और पत्रकारों व पत्रकारिता पर हमले’ विषय पर विजयन ने कहा कि केरल में 2016 की गर्मी कुछ ज्यादा ही गर्म थी जब उसकी तुलना सोमालिया से की गई थी।

नोटबंदी का केरल से ज्यादा विरोध हुआ तो यहां की सहकारी समितियों को जिसमें मेहनतकश केरलवासियों का पैसा लगा है को कालेधन का अड्डा घोषित कर दिया गया। इन दोनों आरोपों का केरलवासियों ने मुंहतोड़ जवाब दिया तो जानवरों पर क्रूरता बनाम गोमांस को मुद्दा बना दिया गया। अब विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री वहां ‘यात्रा’ कर सोशल मीडिया पर केरल की छवि धूमिल करने में लगे हैं। वे केरल को इस्लामी आतंकवाद का अड्डा बनाने में जुटे हुए हैं।

विजयन ने कहा कि केरल एकमात्र वह भारतीय राज्य है जिसे संयुक्त राष्टÑ संघ ने मानव विकास सूचकांक में अव्वल रखा है। कानून व प्रशासन के लिए भी इसे बेहतरीन राज्य का तमगा मिल चुका है। बुजुर्गों की देखभाल के लिए भी यह राज्य उल्लेखनीय है। यह साक्षरता में देश की अगुआई कर रहा है। न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने आजाद पत्रकार और पत्रकारिता पर खतरे के प्रति आगाह किया।

उन्होंने कहा कि आज ऐसे लोग सत्ता में हैं जो नहीं चाहते कि देश में विश्वविद्यालय हो, छात्र हो या पत्रकार व पत्रकारिता दो। डीयूजे की अध्यक्ष सुजाता मधोक ने पत्रकारों पर बढ़ते खतरे के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि अब एकजुट लड़ाई की जरूरत है। डीयूजे के महासविच एसके पांडे ने कहा कि गौरी लंकेश और शांतनु भौमिक जैसे पत्रकारों की हत्या के बाद लोग आजाद मीडिया पर हमले को महसूस कर रहे हैं और इसके खिलाफ आवाज भी उठ रही है।

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