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केरल उच्च न्यायालय का नए मवेशी कानून पर रोक से इंकार

केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के मवेशी व्यापार व वध के नए नियम के खिलाफ याचिका को बुधवार को स्वीकार कर लिया, लेकिन उस पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया।

Author कोच्चि | June 7, 2017 7:06 PM
केरल हाई कोर्ट ने छात्रों को निष्कासित करने के स्कूल के फैसले को सही ठहराया है। (फाइल फोटो)

केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के मवेशी व्यापार व वध के नए नियम के खिलाफ याचिका को बुधवार को स्वीकार कर लिया, लेकिन उस पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया। न्यायालय ने केंद्र से विस्तार से जवाब देने को कहा है। याचिकाकर्ता की मांग को खारिज करते हुए न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 जुलाई की तारीख तय की।  याचिका कांग्रेस विधायक हिबी इडेन तथा कोझिकोड के बीफ व्यापारियों के एक समूह ने दाखिल की है। उनका कहना है कि मवेशी व्यापार तथा वध राज्य का विषय है। याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार का नया नियम लोगों के खानपान के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने न्यायालय से नए नियम पर फौरन रोक लगाने की मांग की। केरल सरकार के वकील ने भी याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए बिंदुओं से सहमति जताई।

वहीं सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार द्वारा मवेशियों के कारोबार नियमों परिवर्तन को लेकर जारी अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर 15 जून को सुनवाई करेगा। सुनवाई इस आधार पर की जाएगी कि क्या यह अधिसूचना मुक्त व्यापार के अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल फहीम कुरैशी के वकील सनोबर अली कुरैशी द्वारा मामले पर जल्द सुनवाई की मांग किए जाने पर 15 जून को सुनवाई का फैसला किया। वकील कुरैशी ने 23 मई को केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा कि आधिकारिक घोषणा कानून के उस प्रावधान के विपरित है, जो धार्मिक बलिदानों के लिए पशुओं की बिक्री की अनुमति देता है।

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