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सबरीमाला विवाद: अगर मंदिर में घुसी युवतियां तो कर लेंगे सामूहिक आत्महत्या- केरल शिवसेना की धमकी

समाचार एजंसी एएनआई के मुताबिक, पार्टी सदस्य पेरिंगम्माला एजी ने कहा, "हमारी कई महिला कार्यकर्ता 17 और 18 अक्टूबर को पम्बा नदी के पास इकट्ठा होंगी। अगर युवतियों ने मंदिर में दाखिल होने की कोशिश की तो हमारी कार्यकर्ता आत्महत्या करेंगी।"

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित था।

केरल शिवसेना ने धमकी दी है कि अगर सबरीमाला मंदिर में युवतियों ने प्रवेश किया तो उसके कार्यकर्ता सामूहिक आत्महत्या करेंगे। समाचार एजंसी एएनआई के मुताबिक, पार्टी सदस्य पेरिंगम्माला एजी ने कहा, “हमारी कई महिला कार्यकर्ता 17 और 18 अक्टूबर को पम्बा नदी के पास इकट्ठा होंगी। अगर युवतियों ने मंदिर में दाखिल होने की कोशिश की तो हमारी कार्यकर्ता आत्महत्या करेंगी।” बीते महीने सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित था। शिवसेना सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विरोध में है।

सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यों की संविधानिक पीठ ने 28 सितंबर को 4-1 के बहुमत से इस मामले में अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट के फैसले से पहले सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म (माहवारी) आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने 53 साल पुरानी इस परंपरा को असंवैधानिक करार दिया था। पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में जस्टिस खानवल्कर, जस्टिस नरीमन, जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संविधान पीठ ने इस पर फैसला सुनाया था।

पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस खानवल्कर, नरीमन और चंद्रचूड़ ने इस प्रथा को भेदभाव करने वाला बताते हुए असंवैधानिक करार दिया था। पूर्व सीजेआई ने कहा था कि पितृसत्तात्मक सोच बदलनी चाहिए। धर्म के रास्ते में इसे रोड़ा नहीं बनना चाहिए। वहीं जस्टिस नरीमन ने कहा था कि 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश न देना उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाना है। जस्टिस चंद्रचूड़ का कहना था- धर्म को महिलाओं के पूजा करने के अधिकार छिपाने या दबाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह मानवीय गरिमा के खिलाफ है। हालांकि जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने संविधान पीठ के बाकी सदस्यों की राय से असहमति जताई थी जिसके बाद 4-1 की बहुमत से फैसला दिया गया।

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