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सबरीमला मंदिर में प्रवेश की कोशिश करने वाली एक्टिविस्‍ट रेहाना फातिमा अरेस्‍ट, BSNL ने किया सस्‍पेंड

फातिमा और हैदराबाद स्थित डिजिटल पत्रकार कविता जक्कला को भारी पुलिस सुरक्षा के तहत मंदिर में ले जाया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने ट्रेकिंग पथ पर उतरने के बाद उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया था।

उन पर अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिये कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा है।

पिछले महीने सबरीमला में अयप्पा मंदिर में मासिक पूजा के लिये कपाट खुलने पर प्रवेश की कोशिश करने वाली कार्यकर्ता रेहाना फातिमा को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने कहा कि उन पर अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिये कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा है। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि 32 वर्षीय फातिमा को कोच्चि में पलारीवोत्तोम स्थित दफ्तर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बीएसएनएल कर्मी कार्यकर्ता के खिलाफ राधाकृष्णा मेनन नाम के शख्स की शिकायत पर पाथानामथिट्टा में मामला दर्ज किया। मेनन का आरोप था कि कार्यकर्ता की कुछ फेसबुक पोस्ट धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली थीं। बीएसएनएल ने उन्‍हें बर्खास्‍त कर दिया है। रेहाना टेक्‍नीशियन के पद पर तैनात थीं।

पुलिस ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद उसे पथानामाथिट्टा ले जाया गया। उच्चतम न्यायालय द्वारा अक्टूबर में 10 से 50 साल आयुवर्ग की महिलाओं को भी मंदिर में प्रवेश की इजाजत का आदेश देने के बाद अक्टूबर में जब सबरीमला मंदिर मासिक पूजा के लिये खुला तो फातिमा ने मंदिर में प्रवेश का प्रयास किया जिसे लेकर केरल में विवाद खड़ा हो गया था। गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए फातिमा ने उच्चतम न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी लेकिन वह खारिज हो गई। याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस मामले में उचित कदम उठा सकती है।

आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद फातिमा और हैदराबाद स्थित डिजिटल पत्रकार कविता जक्कला को भारी पुलिस सुरक्षा के तहत मंदिर में ले जाया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने ट्रेकिंग पथ पर उतरने के बाद उन्हें वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया था, और सर्वोच्च पुजारी ने मंदिर को बंद करने की धमकी दी थी। वे पवित्र स्थल से लगभग 50 मीटर दूर थे। फातिमा के घर को प्रदर्शनकारियों ने बर्बाद कर दिया क्योंकि खबर फैल गई कि उसने हिलटॉप मंदिर में यात्रा करने का प्रयास किया था। सबरीमाला यात्रा के बाद, मुस्लिम जामथ परिषद ने उन्हें समुदाय से निष्कासित कर दिया कि “उन्होंने हिंदू भाइयों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाई”।

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