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यहां मंदिर की रथयात्रा में शामिल होते हैं मुसलमान, मस्जिदों में जाते हैं हिंदू पुजारी

कहा जाता है कि पिछले 3 पीढ़ियों से यहां दोनों धर्म के लोगों का अपने-अपने धार्मिक आयोजनों में एक-दूसरे को न्योता देने और ऐसे आयोजनों में शामिल होने का रिवाज है। मंदिर प्रशासन पहले शुक्रवार को मस्जिद जाना नहीं भूलता, तो मस्जिद के इमाम के ऊपर जिम्मेदारी है कि वो अपने त्योहारों में हिंदूओं को जरूर आमंत्रण दें।

रथ यात्रा (फाइल फोटो)

एक-दूसरे के धर्मों के प्रति बेहतर सम्मान का तरीका शायद ही कोई दूसरा और हो। देश में एक ऐसा जगह भी है जहां मुस्लिम संप्रदाय के लोग मंदिर की रथयात्रा में शामिल होते हैं और पुजारी मस्जिदों में जाते हैं। केरल के मंजेश्वरम में स्थित है श्री उदयवारा आरासुमनजुसनात मंदिर। मंदिर में रथयात्रा निकाले जाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। रथयात्रा चार दिनों की होगी जो 9 मई से लेकर 12 मई तक चलेगी। यह रथयात्रा देश में सिर्फ धार्मिक लिहाज से ही मशहूर नहीं है बल्कि एक खास बात भी इस रथयात्रा को बेहद खास बनाती है। यह यात्रा कई जगहों से होकर गुजरती है। इस दौरान यात्रा का एक पड़ाव मस्जिद भी होता है जहां मस्जिद के इमाम श्रद्धालुओं का तहे दिल से स्वागत करते हैं।

इस मंदिर से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित है मस्जिद। मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा में शामिल होने के लिए मस्जिद के करीब 1000 सदस्यों को हर बार न्योता दिया जाता है। इतना ही नहीं मस्जिद में हर पांच साल में होने वाले विशेष त्योहार में आने के लिए  हिंदूओं को भी खास तौर से आमंत्रित किया जाता है। गांव के लोग इस बात का हमेशा ख्याल रखते हैं कि पूजा आयोजनों में एक-दूसरे के संप्रदाय के लोग जरूर शामिल हों।

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कहा जाता है कि पिछले 3 पीढ़ियों से यहां दोनों धर्म के लोगों का अपने-अपने धार्मिक आयोजनों में एक-दूसरे को न्योता देने और ऐसे आयोजनों में शामिल होने का रिवाज है। मंदिर प्रशासन पहले शुक्रवार को मस्जिद जाना नहीं भूलता, तो मस्जिद के इमाम के ऊपर जिम्मेदारी है कि वो अपने त्योहारों में हिंदूओं को जरूर आमंत्रण दें।

एक खास बात यह भी है कि दोनों ही समुदाय के बुजुर्ग लोग यहां स्थित एक बरगद के पेड़ के पास अक्सर मिलते हैं और इस दौरान गांव के छोटे-मोटे झगड़े भी सुलझा लिये जाते हैं। दोनों ही समुदाय के लोगों को जिला प्रशासन की तरफ से भी यहां काफी मदद मिलती है। प्रशासन समय-समय पर दोनों समुदायों के बीच इस आपसी सौहार्द की ना सिर्फ सराहना करता रहता है बल्कि दोनों धर्मों के त्योहारों में भी प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद की जाती है।

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