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दोस्तों ने कहा था-पत्थर पूजना बेवकूफी, तो कबूला इस्लाम, तीन महीने बाद फिर बनीं हिन्दू

अथिरा ने जुलाई के पहले सप्ताह में अपना घर छोड़ दिया। अथिरा ने 15 पन्नों का एक पत्र अपने माता-पिता के नाम लिखा और कहा कि वो इस्लाम के बारे में बढ़ने जा रही है।

अथिरा का कहना है कि उसने अपने मुस्लिम दोस्तो के बहकावे में आकर इस्लाम कबूल कर लिया था। फोटो- twitter/@innews24

ओम नम: शिवाय। केरल के कासरगोड जिले की 23 साल की अथिरा जब पत्रकारों से मुखातिब हुई तो उसके मुंह से पहला वाक्य यहीं निकला। अथिरा उस युवती की कहानी है जो इसी साल जुलाई में हिन्दू धर्म को छोड़कर इस्लाम कबूल कर ली थी। जुलाई में अथिरा जब मीडिया को संबोधित कर रही थी तो वो हिजाब में थी, तब उसने कहा था, ‘मैं अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल कर रही हूं।’ अथिरा ने तब दुनिया के सामने अपने आपको आएशा नाम से परिचित करवाया था। गुरुवार 21 सितंबर को कोच्चि में आएशा ने फिर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। लेकिन इस बार उसकी शख्सियत बदली बदली हुई थी। इस बार आएशा की हिजाब गायब थी, उसके मस्तक पर तिलक लगा हुआ था उसने एक बिंदी लगा रखी थी। आएशा एक बार फिर से हिन्दू बन गई थी और उसने अपना पुराना नाम अथिरा अपना लिया। द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक अथिरा ने कहा कि उसके दोस्तों ने उसे बहका दिया था, मिसगाइड कर दिया था।

अथिरा ने पत्रकारों को बताया कि उसके मुस्लिम दोस्तों ने उसके सामने इस्लाम का संसार रचा उसे बहकावे में आ गई। अथिरा ने कहा कि उसके दोस्त कहा करते थे कि, एक पत्थर और एक मूर्ति की पूजा करना बेवकूफी है। अथिरा ने बताया कि उसके दोस्त कहते थे कि हिन्दुत्व में कई देवता है, लेकिन इस्लाम में एकमात्र सुप्रीम शख्सियत है। अथिरा कहती है कि धीरे-धीरे उसके दिमाग में हिन्दुत्व के प्रति शक भर गया। अथिरा बताती है कि जब वो इन चीजों के बारे में सोचती तो उसे लगता कि उसके मुस्लिम दोस्त सही कह रहे थे। जल्द ही अथिरा के दोस्त उन्हें इस्लाम के बारे में किताबें देने लगे। अथिरा ने कहा कि उनमें से एक किताब जहन्नुम के बारे में थी। अथिरा इस किताब को पढ़कर बेचैन हो गई, उसे लगने लगा कि अगर वो इस्लाम कबूल नहीं करती है तो उसे भी इस जहन्नुम से गुजरना पड़ेगा। अथिरा बताती है कि उसे भारत से फरार इस्लामी उपदेशक जाकिर नाईक के वीडियो देखने को दिये गये। अथिरा बताती हैं, ‘मुझे यकीन हो गया कि इस्लाम एक बेहतर धर्म है, मैंने आंख मूंद कर यकीन कर लिया कि मेरा धर्म खराब है।’

अथिरा ने जुलाई के पहले सप्ताह में अपना घर छोड़ दिया। अथिरा ने 15 पन्नों का एक पत्र अपने माता-पिता के नाम लिखा और कहा कि वो इस्लाम के बारे में बढ़ने जा रही है। 27 जुलाई को उसने कन्नूर पुलिस के सामने सरेंडर किया, एक स्थानीय अदालत ने उसे नारी निकेतन में भेज दिया। अथिरा के माता-पिता उसकी कस्टडी लेने के लिए केरल हाई कोर्ट गये । अदालत में अथिरा ने कहा कि अगर उसके माता-पिता उसे इस्लामी कायदे कानून मानने से नहीं रोकते हैं तो वो उनके पास जाने को तैयार है। इसके बाद कोर्ट ने अथिरा के माता-पिता को उसकी कस्टडी दे दी। अथिरा बताती है कि मल्लपुरम में वो अपने एक दोस्त के जरिये एक उस्ताद से मिली, जिसके बाद उसे एक व्हाट्सअप ग्रुप से जोड़ दिया गया। इसका नाम था हिदायत सिस्टर्स। अथिरा बताती है कि इस ग्रुप में एक ऐसी लड़की थीं जो मुस्लिम लड़के से प्यार करने की वजह से अपना धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर ली थी।

अथिरा बताती है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के एक कार्यकर्ता सिराज ने उसे कई तरह की सलाह दी। उसके मुताबिक सिराज और उसके जैसे कई लोग उसे बताते थे कि अदालत में उसे किस तरह से बयान देना है। अथिरा के मुताबिक हिन्दू हेल्पलाइन के लोगों ने उसके पिता की मदद की और उसे एर्नाकुलम के अर्स विद्या समाजम के बारे में बताया। अथिरा के मुताबिक इन लोगों ने उन पर कोई दवाब नहीं दिया, बल्कि उसे सही सूचना दी। उन्होंने अथिरा को खुले दिमाग से कुरान को फिर से पढ़ने की शिक्षा दी। अथिरा कहती है कि जब मैने तार्किक ढंग से कुरान पढ़ा, तो मेरे दिमाग में कई शंकाएं पैदा हुई। अथिरा ने इसके बाद समाजम में दाखिला लिया और इसके बाद उसने फिर से हिन्दुत्व में लौटने का फैसला लिया।

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