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तीसरा कोण बन गई भाजपा, एलडीएफ व यूडीएफ को मिली चुनौती

केरल में मंगलवार को सभी 140 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में वोट डाले गए।

शुक्रवार को एक कार्यक्रम में केरल के सीएम पिनाराई विजयन और सीपीआई नेता बिनाॅय विश्वम। (पीटीआई)

केरल में मंगलवार को सभी 140 विधानसभा सीटों के लिए एक ही चरण में वोट डाले गए। इस बार भाजपा अच्छी ताकत झोंकी है। अपने प्रचार अभियान में भाजपा ने यूडीएफ और सत्ताधारी- एलडीएफ दोनों ही गठबंधनों के नेताओं पर जमकर निशाना साधा है। भाजपा की कोशिश रही है कि वह अपनी एक सीट की संख्या बढ़ा ले।

चुनाव प्रचार अभियान में एलडीएफ ने फोकस विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर रखा। लेकिन, सोना तस्करी घोटाला और परिवारवाद की छाया ने पीछा नहीं छोड़ा। उधर, यूडीएफ और एनडीए सबरीमाला पर सरकार की घेराबंदी की। भाजपा ने लव जिहाद के मुद्दे पर ईसाई वोटरों को साधने का प्रयास किया।

यूडीएफ ने एलडीएफ सरकार की अमेरिकी कंपनी से संधि को लेकर नाराज मछुआरों को साधने का प्रयास किया है। वहीं, नायर और एझावा समुदायों पर प्रभाव रखने वाली नायर सर्विस सोसायटी (एनएसएस)और श्रीनारायण धर्म परिपालनायोगम (एसएनडीपीवाइ) का रुख वामो के लिए मुफीद नहीं है।

यहां माकपा की अगुआई में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार है और पिनराई विजयन मुख्यमंत्री हैं। निवर्तमान विधानसभा में एलडीएफ को 91 और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की 47 सीटें हैं। यहां बहुमत के लिए 71 सीटें चाहिए।

केरल में भाजपा ने धीरे धीरे अपना पैर पसारा है और वोट की हिस्सेदारी भी बढ़ाई है। साल 2011 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 6.03 फीसद, 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 10.85 फीसद, साल 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए को 14.96 फीसद और साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-एनडी को 15.2 फीसद वोट मिले थे।

पिछले साल यानी 2020 में हुए पंचायत चुनावों में भाजपा को करीब 17 फीसद वोट मिले थे। इस हिसाब से भाजपा ने इस बार के चुनाव में मजबूती के साथ टक्कर दी है। इस बात का आभास विपक्षी दलों को हैं, इसलिए वे इस बार थोड़ा परेशान नजर आ रहे हैं। पिछले साल हुए पंचायत चुनावों में भाजपा को अच्छी सफलता मिली।

एनडीए को 1182 ग्राम पंचायतों, 37 ब्लॉक पंचायत, 2 जिला पंचायत, 320 नगर पालिका वार्ड और 59 नगर निगम वार्ड में जीत हासिल हुई। भाजपा को राज्य में पंचायत चुनाव के दौरान करीब 35 लाख वोट मिले। वहीं, साल 2015 के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा को करीब 13.28 फीसद वोट मिले थे।

केरल के रूप में वामदलों के पास एकमात्र राज्य बचा है। जाहिर तौर पर अगर केरल में भी नाकामी हाथ लगी तो वामदलों की देश की राजनीति में प्रासंगिकता खत्म होने पर मुहर लग जाएगी। यहां कांग्रेस के लिए करो या मरो की स्थिति है।
भाजपा ने पलक्कड सीट से 88 साल के ई. श्रीधरन को चुनावी मैदान में उतारा है। पार्टी को इस सीट से काफी उम्मीद है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पलक्कड में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में रोड शो कर चुके हैं। इस सीट पर श्रीधरन का मुकाबला दो बार से लगातार विधायक रहे कांग्रेस उम्मीदवार शाफी परमबिल से है। 38 साल के शाफी अपना पहला चुनाव करीब सात हजार वोट से और फिर 2016 का चुनाव करीब 17 हजार वोटों से जीते थे। पिछले चुनाव में भाजपा ने पहली बार केरल में अपना खाता खोला था और नेमम सीट पर जीत दर्ज की थी।

भाजपा ने पलक्कड सीट से 88 साल के ई. श्रीधरन को चुनावी मैदान में उतारा है। पार्टी को इस सीट से काफी उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पलक्कड में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में रोड शो कर चुके हैं। इस सीट पर श्रीधरन का मुकाबला दो बार से लगातार विधायक रहे कांग्रेस उम्मीदवार शाफी परमबिल से है। 38 साल के शाफी अपना पहला चुनाव करीब सात हजार वोट से और फिर 2016 का चुनाव करीब 17 हजार वोटों से जीते थे। पिछले चुनाव में भाजपा ने पहली बार केरल में अपना खाता खोला था और नेमम सीट पर जीत दर्ज की थी।

केरल में भाजपा ने धीरे धीरे अपना पैर पसारा है और वोट की हिस्सेदारी भी बढ़ाई है। साल 2011 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 6.03 फीसद, 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 10.85 फीसद, साल 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए को 14.96 फीसद और साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-एनडी को 15.2 फीसद वोट मिले थे।

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