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केरल HC के हस्तक्षेप के बाद आनंद पटवर्धन की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को मंजूरी, 26 जून को दिखाई जाएगी फिल्म फेस्ट में

आनंद पटवर्धन की फिल्म 'विवेक' अभी तक दुनियाभर में बहुत से पुरस्कार जीत चुकी है। इसमें एम्स्टर्डम के 31वें अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फीचर-लेंथ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार भी शामिल है।

फिल्म करीब चार घंटे की है, जिसकी शुरुआत नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्याओं और सनातन संस्था की भूमिका को दिखाते हुए दक्षिणपंथी उग्रवादी हिंसा फैलाने की कहानी से शुरू होती है। (patwardhan.com)

केरल हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मशहूर फिल्मकार आनंद पटवर्धन की डॉक्यूमेंट्री ‘विवेक/रीजन’ की स्क्रीनिंग को इजाजत दे दी गई। अब बुधवार (26 जून, 2019) को यह फिल्म केरल डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्म महोत्सव (आईडीएसएफएफके) में दिखाई जाएगी। दरअसल, पटवर्धन की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने को अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

जानकारी के मुताबिक, फिल्म करीब चार घंटे की है, जिसकी शुरुआत नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्याओं और सनातन संस्था की भूमिका को दिखाते हुए दक्षिणपंथी उग्रवादी हिंसा फैलाने की कहानी से शुरू होती है। इसके बाद फिल्म में दलित विरोध प्रदर्शन और हाल के सालों में दलित नेताओं के उभार को दिखाया गया है। फिल्म का अंत उत्तर प्रदेश के दादरी गांव में मोहम्मद अखलाक की गोहत्या के शक में हुई हत्या की कहानी के साथ होता है।

पटवर्धन की फिल्म ‘विवेक’ दुनिया भर में बहुत से पुरस्कार जीत चुकी है। इसमें एम्स्टर्डम के 31वें अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फीचर-लेंथ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार भी शामिल है। अंग्रेजी अखबार द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक फेस्टिवल के आयोजनकर्ता केरल स्टेट चलचित्र अकादमी ने 24 जून से 26 जून (फेस्टिवल का आखिरी दिन) तक फिल्म की स्क्रीनिंग को स्थगित कर दिया है। अकादमी को उम्मीद है कि तब तक फिल्म की स्क्रीनिंग की अनुमति मिल सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सूचना मंत्रालय की ‘देरी की रणनीति’ के खिलाफ आयोजनकर्ता केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

फेस्टिवल के डायरेक्टर कमल ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, ‘हम पिछले 20 दिनों से केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अब…हम कानूनी रूप से आगे बढ़ेंगे।’ उन्होंने आगे कहा कि चूंकि फिल्म पहले ही यूट्यूब पर है और इसे कई बार देखा भी जा चुका है। ऐसे में सीधे तौर पर केंद्र का अनुमति देने से इनकार करने का कोई मतलब नहीं बनता। वहीं मंत्रालय ने फिल्म की स्क्रीनिंग को मंजूरी नहीं देने की वजह कानून व्यवस्था बताई है।

गौरतलब है कि फिछले साल भी कश्मीर घाटी के कलाकारों पर बनी एक फिल्म को मुंबई फेस्टिवल में दिखाने से आखिरी समय में मना कर दिया गया था, जबकि दर्शक इस फिल्म को देखने के लिए ऑडिटोरियम में जमा हो चुके थे।

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