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सबरीमला के बाद अब अगस्‍त्‍यकूडम की चोटी पर चढ़ाई करेंगी महिलाएं, अब तक सिर्फ पुरुष जाते थे

कानि जनजाति के सदस्यों के अनुसार, वे पारंपरिक रूप से पहाड़ी में अगस्त्य मुनि की मूर्ति की पूजा करते रहे हैं, और महिलाओं के लिए मूर्ति के पास नहीं जाने की प्रथा है।

महिला ट्रेकर्स के लिए कोई विशेष सुविधाएं नहीं होंगी। (फाइल फोटो)

सबरीमाला मंदिर में अपनी ऐतिहासिक एंट्री के बाद, अब महिलाएं 41 दिनों की अगस्‍त्‍यकूडम चोटी की अपनी पहली यात्रा के लिए निकलेगी। यह 14 जनवरी से शुरू हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश सक्षम हो गया, तो हाल ही में हाई कोर्ट के आदेश ने महिलाओं के लिए अगस्त्य पहाड़ी का मार्ग प्रशस्त किया है। महिलाओं को तिरुवनंतपुरम जिले में नेय्यर वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित 1,868 मीटर ऊंची वार्षिक ट्रेक में भाग लेने की अनुमति नहीं थी।

पिछले साल 30 नवंबर को उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनु शिवरामन ने फैसला सुनाया कि किसी भी प्रतिभागी के लिंग के आधार पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, जबकि पर्यटकों को ट्रेकिंग की अनुमति दी जाती है। उच्च न्यायालय में दो महिला संगठनों द्वारा याचिक पर फैसला सुनाया। इनमें मलप्पुरम की वूमन इंटीग्रेशन और ग्रोथ थ्रू स्पोर्ट्स और कोझीकोड की अन्वेशी शामिल हैं। शनिवार को केरल वन विभाग ने ट्रेकिंग के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया, और इस साल के लिए बुकिंग दो घंटे के भीतर खत्म हो गई।

वन्यजीव वार्डन (तिरुवनंतपुरम) शाजी कुमार ने कहा कि प्रति दिन 100 ट्रेकर्स के साथ, 41 दिनों के वार्षिक सत्र के दौरान 4,100 आगंतुकों को प्रवेश दिया जाएगा। “(सभी) पंजीकरण प्रक्रिया के बाद ही महिला आवेदकों की संख्या का पता चल सकेगा। महिला ट्रेकर्स के लिए कोई विशेष सुविधाएं नहीं होंगी, जिन्हें पहली बार अत्यधिक कठिन इलाके पर चढ़ने के लिए चोटी पर जाने की अनुमति दी जा रही है।’ राज्य के वन विभाग ने अब तक केवल कानि आदिवासी समुदाय के विरोध को देखते हुए पुरुषों को ट्रेकिंग की अनुमति दी थी, जो अगस्त्य मुनि की पूजा करता है। अगस्‍त्‍यकूडम में कानि समुदाय का कोई मंदिर नहीं है – केवल एक मूर्ति है। वे शिखर पर कोई पूजा नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी कहा है कि जिस क्षेत्र में मूर्ति स्थित है, वहां किसी भी ट्रेकर को जाने की अनुमति नहीं होगी।

कानि जनजाति के सदस्यों के अनुसार, वे पारंपरिक रूप से पहाड़ी में अगस्त्य मुनि की मूर्ति की पूजा करते रहे हैं, और महिलाओं के लिए मूर्ति के पास नहीं जाने की प्रथा है। उनके अनुसार, अगस्त्योदयम में एक बेस स्टेशन अथिरमाला से आगे जाने के लिए महिलाओं को अनुमति देना, उनकी पारंपरिक पूजा के अधिकारों में हस्तक्षेप करेगा। इस प्रकार, उन्होंने ट्रेक के लिए महिलाओं को अनुमति देने पर विभाग के दिशानिर्देशों को चुनौती दी।

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