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5वीं कक्षा से रहीं CPM के साथ, अब 21 साल की उम्र में सजेगा सिर पर देश की सबसे युवा मेयर का ताज

आर्या ने मुदावनमुकल वॉर्ड से चुनाव जीता है। आर्या के राजनीतिक रुचि की बात बताते हुए उनके पिता एमके राजेंद्रन कहत हैं, 'हमारा परिवार ही राजनीति है।' राजेंद्रन की पत्नी श्रीलता एक एलआईसी एजेंट हैं।

Author Translated By अंकित ओझा तिरुवनंतपुरम | Updated: December 26, 2020 11:04 AM
arya rajendran, cpm21 साल की उम्र में आर्या राजेंद्र्न कि सिर सजेगा मेयर का ताज। (तस्वीर- ट्विटर @jyothivinesh)

21 साल की आर्या राजेंद्रन के सिर देश की सबसे युवा मेयर होने का ताज सजने जा रहा है। वह अभी B.Sc. मैथ्स द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। उनके पिता एक इलेक्ट्रीशन हैं। राजेंद्रन का परिवार हमेशा से सीपीएम सपोर्टर रहा है। एलडीएफ ने 100 वॉर्ड में से 51 सीटें हासिल की हैं। पार्टी उन्हें तिरुवनंतपुरम सिटी कॉर्पोरेशन का हेड नियुक्त करने वाली है।

आर्या ने मुदावनमुकल वॉर्ड से चुनाव जीता है। आर्या के राजनीतिक रुचि की बात बताते हुए उनके पिता एमके राजेंद्रन कहत हैं, ‘हमारा परिवार ही राजनीति है।’ राजेंद्रन की पत्नी श्रीलता एक एलआईसी एजेंट हैं। आर्या का भाई ऑटोमोबाइल इंजिनियरिंग करके अब मिडल ईस्ट में काम करता है और वह भी सीपीएम का सदस्य है।

आर्या जब 9 साल की थीं तभी सीपीएम के साथ जुड़ गई थीं। पांचवीं कक्षा में ही उन्होंने बच्चों का संगठन बालासंगम जॉइन कर लिया था। शनिवार को पार्टी अपने फैसले का औपचारिक ऐलान करने वाली है। आर्या ने बताया, ‘जिला अध्यक्ष बनने के बाद मैं दो साल तक बालासंगम की स्टेट प्रेजिटेंड रही। बालासंगम में अच्छी भूमिका के बाद मुझे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की जिम्मेदारी दी गई।’

केरल लोकल बॉडी की आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यहां एक बार पुरुष मेयर होता है तो एक बार महिला। पिछली बार वीके प्रशांत यहां से मेयर थे। इस बार महिला को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। पहले दो महिला उम्मीदवारों को सीपीएम ने मेयर पद के लिए प्रोजेक्ट किया था लेकिन दोनों ही चुनाव हार गईं।

कई साल से राजनीति में ऐक्टिव के होने के बावजूद आर्या अपनी अकैडमिक लाइफ को अलग ही रखती हैं। वह कैरमेल गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल से पढ़ी हैं। आर्या का कहना है कि मेयर बनने के बाद वह रेग्युलर क्लास नहीं अटेंड कर पाएंगी। लेकिन सभी स्टूडेंट और टीचर उनकी मदद करते हैं।

आर्या राजेंद्रन केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा को अपना आदर्श मानती हैं। उनका कहना है कि शैलजा ने अद्भुत काम किया है और कोरोना महामारी से निपटने में बड़ी भूमिका निभाई है। मलयालम में बड़े लेखक एमटी वासुदेवन ने भी सीपीएम के इस फैसले का स्वागत किया है।

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