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राम की शरण में माकपा! केरल में जन्माष्टमी के बाद मनेगा रामायण माह

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में कई महीने शेष हैं, लेकिन इसके लिए रणनीति बनाने का काम अभी से शुरू हो गया है। इसके तहत बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को भाजपा के पाले में जाने से रोकने की कवायद के तहत केरल में सत्तारूढ़ माकपा ने रामायण महीना मनाने का फैसला किया है। पार्टी ने 17 जुलाई से 16 अगस्त के बीच कई कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।

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बीजेपी वर्षों से केरल में राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटी है। केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद इस अभियान को और गति दी गई है। बीजेपी के लगातार बढ़ते प्रभाव को देखते हुए केरल में सत्तारूढ़ माकपा ने नई रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने श्रीकृष्ण जयंती महोत्सव (कृष्ण जन्माष्टमी) का आयोजन करने के बाद अब ‘रामायण महीना’ मनाने का फैसला किया है। 17 जुलाई से मलयालम कैलेंडर के अनुसार आखिरी महीना शुरू होने जा रहा है। यह 16 अगस्त तक रहेगा। मलयालम संस्कृति में इस महीने को कारकिदक्कम के तौर पर जाना जाता है। कारकिदक्कम में मानसून अंतिम चरण में पहुंच जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में इंसानों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसके कारण उनकी क्षमताओं में कमी आती है। इसे देखते हुए लोग शाम के वक्त अपने घरों और मंदिरों में रामायण का पाठ करते हैं। इस महीने के दौरान लोग आयुर्वेद चिकित्सा भी कराते हैं। मान्यताओं पर भरोसा करें तो इससे इंसान का शरीर और दिमाग फिर से तरोताजा हो जाता है।

हिंदू समुदाय को लुभाने की कवायद!: केरल में सत्तारूढ़ माकपा कारकिदक्कम महीने का इस्तेमाल आमलोगों तक पहुंचने के तौर पर करने की कोशिश में जुटी है। इस अवधि को रामायण महीने के तौर पर मनाने का खाका तैयार करते हुए पार्टी ने इस मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। माकपा इसके तहत पार्टी कैडरों को रामायण के उपदेशों से रूबरू कराने का फैसला किया है। इसके लिए बाकायदा संस्कृत भाषा के जानकारों की सेवा ली जाएगी। योजना के तहत 25 जुलाई को राज्यस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। माकपा के इस कदम को हिंदू समुदाय को लुभाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, केरल में राजनीतिक जमीन तलाश रही भाजपा हिंदुत्व के दम पर पैठ बनाने की कोशिश में जुटी है। माकपा ने भाजपा के इस प्रयास को विफल करने के लिए रामायण महीना मनाने का फैसला किया है। माकपा बहुसंख्यक समुदाय को भाजपा के पाले में जाने से रोकने की जुगत में भी है। बता दें कि वर्ष 2019 में लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसे देखते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नजर दक्षिण भारतीय राज्यों पर है। इसमें केरल सबसे अहम है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पूर्व में कई बार केरल का दौरा कर चुके हैं।

संस्कृत संघ करेगा समारोह का आयोजन: ‘मुंबई मिरर’ के अनुसार, रामायण महीने के दौरान माकपा की ओर से संस्कृत संघ विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। पार्टी की स्टेट कमेटी के सदस्य वी. शिवदासन को राज्यभर में कार्यक्रम आयोजित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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