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केरल: अस्पताल में COVID पॉजिटिव महिला जमीन पर पड़ी और बेड से बंधी मिली, तस्वीरें सामने आने के बाद कांग्रेस ने की कार्रवाई की मांग

बुजुर्ग महिला को 20 अक्टूबर को COVID प्राथमिक उपचार केंद्र से त्रिसूर मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट कर दिया गया। महिला को एक ऐसा बेड दिया गया था जिस पर कोई साइड रेलिंग नहीं थी।

परिवार ने आरोप लगाया है कि उसके हाथ अस्पताल के बेड से बंधे हुए थे, अस्पताल प्रशासन इस तरह की खामियों से इंकार किया है।

कांग्रेस सांसद टीएन प्रथपन ने केरल के स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा को पत्र लिखा है क्योंकि उन्होंने एक कोविड मरीज 67 वर्षीय महिला के इलाज में कथित खामियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। मरीज के परिवार के अनुसार, त्रिशूर मेडिकल कॉलेज में वह फ्लोर पर पड़ी मिली थीं घायल थीं और खून बह रहा था। जबकि परिवार ने आरोप लगाया है कि उसके हाथ अस्पताल के बेड से बंधे हुए थे, अस्पताल प्रशासन इस तरह की खामियों से इंकार किया है, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि “वह बंधा नहीं था, लेकिन एक मनोचिकित्सक की सलाह के बाद उसे ऐसे रखा गया था, ताकि वह उसे हाथ में लगी हुई सुईं न निकाले”।

कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में कहा है: “बुजुर्ग महिला को 20 अक्टूबर को COVID प्राथमिक उपचार केंद्र से त्रिसूर मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट कर दिया गया। महिला को एक ऐसा बेड दिया गया था जिस पर कोई साइड रेलिंग नहीं थी। उसके हाथ बिस्तर से कपड़े से बंधे थे। बुजुर्ग महिला बिस्तर से गिर गई, और उसके सिर और चेहरे पर गहरी चोट लगी, जिससे खून बह रहा था।” कांग्रेस सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा से एक घटना की जांच करने की मांग की, जहां एक बुजुर्ग महिला, जो कि COVID19 पॉजिटिव थी, को कथित तौर पर उसे बिस्तर पर गिरने से रोकने के लिए बिस्तर से बांध दिया गया था – बजाय इसके कि गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज त्रिशूर में उन्हें एक रैलिंग वाला बेड दिया जाए।

टीएन प्रथपन ने त्रिसूर मेडिकल कॉलेज पर आरोप लगाया है कि वर्तमान में COVID से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों के साथ रोगियों के इलाज के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं की सेवाएं नहीं हैं, और परिवार द्वारा विभिन्न अधिकारियों को शिकायत और घटना की तस्वीरें प्रस्तुत करने के बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एनडीटीवी के मुताबिक बुजुर्ग महिला के दामाद फारूक ने बताया कि उनके परिवार के छह सदस्य कोरोना पॉजिटिव निकले थे, और उन्हें लगभग एक ही समय अलग अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

“मेरे परिवार के छह सदस्य कोरोना पॉजिटिव थे, जिनमें मेरे ससुर भी शामिल हैं। मैं एक निजी अस्पताल में अपने ससुर के साथ था। मुझे COVID फ्रंटलाइन सेंटर के डॉक्टर का फोन आया, जहां मेरे कुछ परिवार के सदस्यों को यह कहते हुए भर्ती कराया गया कि मेरी सास को मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा है। मैंने अनुमति दे दी। और अगले दिन जब एक रिश्तेदार मरीज को देखने के लिए गया, तो उसने उसे फर्श पर देखा, घायल पाया। उसने आरोप लगाया कि किसी दूसरे मरीज के साथ वालों ने इसकी वीडियो बना ली।”

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधिकारियों ने दावा किया है कि ये झूठे आरोप हैं। “वह नीचे बंधा नहीं था, लेकिन मनोचिकित्सक की सलाह के आधार पर शारीरिक रूप से संयमित था।  वह गिर गई … यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा हुआ। उनके गहरी चोट नहीं आई हैं।” कोई चूक नहीं। हमने स्वास्थ्य मंत्री को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, “।

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