जन आंदोलन से खड़ी हुई आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने उनका साथ छोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गए। वहीं, करीब एक वर्ष पहले दिल्ली की सत्ता भी उनके हाथ से चली गई थी। यह झटका किसी और ने नहीं, बल्कि केजरीवाल के एकदम खास माने जाने वाले करीबियों ने दिया है, जिनमें राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
दरअसल, इससे पहले संघर्ष के कई साथी अरविंद केजरीवाल को एक-एक कर छोड़कर चले गए थे। उस वक्त भी आंदोलन के सहयोगियों ने विचारधारा के साथ समझौता करने का आरोप लगाया था और अब सातों सांसदों ने केजरीवाल पर पार्टी की विचारधारा से समझौता करने का ही आरोप लगाते हुए पार्टी बदल ली।
केजरीवाल के संघर्ष के साथी रहे प्रशांत भूषण, उनके पिता शांति भूषण, किरण बेदी, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, मयंक गांधी, प्रोफेसर आनंद कुमार, शाजिया इल्मी, आशुतोष, कपिल मिश्रा, सुच्चा सिंह छोटेपुर और दलजीत सिंह ये कुछ ऐसे नाम हैं, जो पूर्व में उनका साथ छोड़ चुके हैं। प्रशांत भूषण और शांति भूषण वे शख्स थे, जिन्होंने आंदोलन के वक्त और पार्टी बनने के बाद आर्थिक मदद के साथ ही पार्टी को दिल्ली में खड़ा करने का कार्य किया था।
दिल्ली के नेताओं में आप के शासनकाल में मंत्री रहे राज पाल गौतम और कैलाश गहलोत ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी छोड़ी थी। वहीं, वर्तमान में दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने भी केजरीवाल का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। पूर्व में साथ छोड़ने वालों में कुमार विश्वास और किरण बेदी दो बड़े नाम हैं, जो आंदोलन के दौरान केजरीवाल के कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे थे। दिल्ली में सत्ता जाने के बाद से पार्टी की अंदरूनी खींचतान चरम पर है। वहीं, आगामी वर्ष 2027 में पंजाब विधानसभा का भी चुनाव होना है।
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आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है। इन सांसदों का पार्टी छोड़ना सिर्फ़ दिल्ली में झटका नहीं है, बल्कि पंजाब में भी इसका असर पड़ सकता है। पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। AAP नेतृत्व को इस बात की चिंता है कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक की पंजाब में गहरी संगठनात्मक भूमिका निभा चुके हैं। 2022 के चुनावों से पहले उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुने जाने तक इनका काफी असर रहा। AAP के लगभग 50% विधायक मानते हैं कि राघव चड्ढा या संदीप पाठक को वजह से ही पिछले चुनाव में इन्हें टिकट मिला। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
