केदारनाथ त्रासदी के 3 साल: चारों ओर फैला था तबाही का मंजर, बह गईं थीं करीब 5000 जिंदगियां - Jansatta
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केदारनाथ त्रासदी के 3 साल: चारों ओर फैला था तबाही का मंजर, बह गईं थीं करीब 5000 जिंदगियां

केदारनाथ में 80 फीसदी पुनर्निर्माण कार्य हो चुका है जबकि बचा हुआ 20 फीसदी काम भी अगले दो माह में पूरा हो जाएगा।

Author केदारनाथ | June 16, 2016 8:07 PM
2013 में केदारनाथ में आई भीषण त्रासदी की तस्वीर।

केदारनाथ मंदिर के पास शांत बह रही मंदाकिनी के नवनिर्मित किनारे पर खडे होकर तीन साल पहले गुरुवार के ही दिन 16 जून की रात्रि में नदी के उस रौद्र रूप के बारे में सोच पाना भी मुश्किल है जब उसके पानी में आए प्रलयंकारी उफान में हिमालयी धाम के डूबने के साथ ही देश भर से आए श्रद्धालुओं, पुजारी, व्यापारी और स्थानीय लोगों सहित करीब 5000 जिंदगियां बह गईं।

पूरे देश को हिलाकर रख देने वाली इस आपदा के निशान दूर होने और पुनर्निर्माण कार्य के एक बडे हिस्से के पूरा होने के साथ ही आज केदारपुरी फिर से लोगों के आने जाने और सभी प्रकार के गतिविधियों के शुरू होने से गुलजार नजर आने लगी है। नदी के सामने से शुरू होकर केदारनाथ मंदिर तक जाने वाली 50 फुट चौड़ी सड़क, हेलीकॉप्टरों के लिए एक बड़ा हेलीपैड और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सुंदर कॉटेज सहित कई प्रकार की आधारभूत सुविधाओं के विकास के कारण केदारनाथ क्षेत्र काफी शानदार नजर आ रहा है।

इस सबके कारण मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है और पिछले महीने ही शुरू हुई चारधाम यात्रा के दौरान अब तक केदारनाथ में दो लाख से ज्यादा तीर्थयात्री आ चुके हैं। श्रीकेदारनाथ-बदरीनाथ मंदिर समिति के विशेष कार्याधिकारी बीडी सिंह ने बताया, ‘केदारनाथ मंदिर को खुले एक महीने से कुछ ही ज्यादा समय हुआ है लेकिन अभी तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर दर्शन के लिए आ चुके हैं। अगर यही क्रम जारी रहा तो हमें उम्मीद है कि छह माह बाद यात्रा सीजन की समाप्ति तक केदारनाथ में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड सात लाख तक पहुंचेगी।’

तीर्थयात्रियों की संख्या में इस बढ़ोत्तरी का श्रेय मुख्यमंत्री हरीश रावत के केंद्रित द्रष्टिकोण को देते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने केदारनाथ को कभी अपनी प्राथमिकता की सूची से नहीं हटाया और मंदिर क्षेत्र के पुनर्निर्माण के कार्य में लगी सभी एजेंसियों ने बिना रुके तीन साल तक काम किया जिससे लोगों को तीर्थयात्रा को सर्वश्रेष्ठ अनुभव मिल सके।

उत्तरकाशी स्थित नेहरू इंस्टीटयूट ऑफ माउंटेनियरिंग (निम) के निदेशक अजय कोठियाल ने कहा, ‘केदारनाथ में 80 फीसदी पुनर्निर्माण कार्य हो चुका है जबकि बचा हुआ 20 फीसदी काम भी अगले दो माह में पूरा हो जाएगा। क्षेत्र में बहुत सारे निर्माण कार्य का श्रेय निम को जाता है।’ निम ने केदारनथ से लाखों टन मलबा हटाने, मंदाकिनी से मंदिर तक सड़क बनाने, हेलीपैड बनाने और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए मंदिर के निकट 25 कॉटेज बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

कर्नल कोठियाल ने कहा, ‘अब हमें मंदिर तथा तीर्थ पुरोहितों के घरों के चारों तरफ एक त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार बनानी है और उसके भी इस सीजन के अंत तक पूरा हो जाने की संभावना है।’ निम के करीब 700 प्रशिक्षित कर्मियों के साथ 11,755 फुट की उंचाई पर स्थित मंदिर क्षेत्र में दिन-रात काम करने के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में उन्होंने कहा कि इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती बर्फ को साफ करना था जिसके नीचे लाखों टन मलबा दबा था।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा दूसरी बड़ी चुनौती अपने प्रशिक्षित लोगों को उस जगह पर काम करने के लिए प्रेरित करना था जहां कुछ समय पहले इतनी बडी आपदा आई हो। कर्नल कोठियाल ने कहा, ‘हमारे कई लोग केवल एक दिन बाद ही अपने अस्थायी टैंटों में से भाग गए क्योंकि उन्हें उस जगह पर कुछ डरावना सा महसूस हो रहा था। उन्हें भूतों का भ्रम हो रहा था और उनका डर भगाने के लिए हमें विशेष प्रकार के कार्यक्रम करने पड़े।’

उन्होंने मुख्यमंत्री रावत की इस बात के लिए सराहना की कि उन्होंने केदारनाथ को लगातार अपनी प्राथमिकता पर रखा और सर्दियों में भी अक्सर मंदिर क्षेत्र का दौरा करते रहे। कर्नल कोठियाल ने कहा, ‘हम शून्य से नीचे 18-19 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी काम करते थे। लेकिन मुख्यमंत्री लगातार सर्दियों में भी केदारनाथ आते रहे और हमेशा हमारे साथ खड़े रहे। एक बार तो वह पोर्टर्स के लिए गर्म इनरवियर लाए और एक बार हमारे लिए देहरादून से हरी सब्जियां लेकर आए। इस तरह के दिल को छू लेने वाले भावों से हमें प्रेरणा मिलती रही।’

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