ताज़ा खबर
 

कौमी एकता दल के विलय ने मचाया सपा में सियासी तूफान

कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय होने से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद नाराज बताए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मीडिया से बात करते हुए। (पीटीआई फाइल फोटो)

पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल (एकता पार्टी) के समाजवादी पार्टी में विलय के बाद सपा में भूचाल पैदा हो गया है। मंगलवार को एकता पार्टी का सपा में विलय होने के बाद समाजवादी पार्टी में उठा सियासी तूफान बुधवार को भी जारी रहा। इस मामले में कबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने मुख्यमंत्री से करीब एक घंटे लंबी वार्ता की है। शिवपाल का कहना है कि मंगलवार को माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी की वजह कौमी एकता दल के लिए की गई उनकी पैरवी नहीं थी। बर्खास्तगी की वजहें दूसरी हैं। हालांकि मंत्री की बर्खास्तगी के कारणों पर वे चुप्पी साध गए।

कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय होने से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस मसले पर उनसे पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मंगलवार से अब तक या तो मुलाकात की है या फोन पर उनसे बात की है। सभी अखिलेश को मनाने और समझाने की कोशिश में हैं लेकिन सपा के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि एकता पार्टी के सपा में विलय को मुख्यमंत्री किसी भी हाल में नजरअंदाज करने की मुद्रा में नहीं हैं। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के समय डीपी यादव को टिकट न देकर अखिलेश ने जो लोकप्रियता बटोरी थी उसपर मुख्तार की पार्टी के विलय ने गहरा आघात किया है। हालांकि शिवपाल सिंह यादव ने मुख्तार अंसारी का नाम न लेते हुए कहा कि वे सपा में शामिल नहीं हुए हैं लेकिन वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजेन्द्र कुमार कहते हैं, कि जिस कौमी एकता दल से मुख्तार खुद विधायक हैं, जब उसका विलय सपा में हो गया तो वे सपा से बाहर कैसे हो सकते हैं?

बहरहाल कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय का लाभ मुख्तार अंसारी को तत्काल पहुंचा है और उन्हें मंगलवार की देर शाम आगरा जेल से लखनऊ जेल स्थानांतरित कर दिया गया है। कौमी एकता दल के सपा में विलय के सवाल पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि इस मामले में मुख्यमंत्री को नाराज दिखाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। ऐसा ही संदेश रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को मंत्री बनाने के दौरान भी देने की कोशिशें हुई थीं। उस वक्त भी कहा गया था कि अखिलेश इस फैसले से खुश नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की लोकप्रियता की हकीकत को सपा के वरिष्ठ नेता बखूबी समझते हैं। इसीलिए पहले बेनीप्रसाद वर्मा और अमर सिंह को राज्यसभा सांसद बनाया गया। उसके बाद कौमी एकता दल का सहारा लिया गया।

वे कहते हैं कि दरअसल सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव विधानसभा चुनाव में ऐसी सभी कोशिशें कर लेना चाहते हैं जिसके सहारे वह चुनावी मैदान में कुछ हासिल कर सकें। जबकि हकीकत यह है कि यदि उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी ने चार साल में प्रदेश में विकास किया होता तो उसे ऐसे किसी सियासी हथकंडे का सहारा लेने की आवश्यकता ही नहीं होती। किसी भी राजनीतिक दल का विलय इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सपा अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है।

फिलहाल कौमी एकता दल के सपा में विलय से मुख्यमंत्री खासे खफा बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस मामले में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से लंबी मंत्रणा की है। जिसके बाद 25 जून को समाजवादी पार्टी ने बैठक बुलाकर इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने का मन बनाया है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories